सबरीमाला: यहां 52 वर्षीय एक महिला को शनिवार को सबरीमाला मंदिर में दर्शन से पहले ही वहां मौजूद भक्तों के क्रोध का सामना करना पड़ा, और उन्होंने उस महिला को घेर लिया. हालांकि महिला की पहचान और उसकी उम्र का सत्यापन होने के बाद उसे मंदिर में दर्शन की अनुमति दे दी गई. अपने पति और बेटे के साथ नीली साड़ी में मंदिर पहुंची महिला लता को उस समय रोक दिया गया, जब सबरीमाला मंदिर के पुजारी उस महिला की आयु को लेकर संदेह कर अय्यप्पा के नारे लगाने लगे.

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महिला को 50 वर्ष से कम की आयु के संदेह में उन्होंने उसे घेर लिया. मंदिर में सदियों से 10 से 50 साल की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है. सर्वोच्च न्यायालय ने हालांकि 28 सितंबर को एक आदेश में इस प्रथा को समाप्त कर दिया, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद 17 अक्टूबर को पहली बार इस मंदिर के द्वार खुलने के बाद से मंदिर युद्धस्थल के रूप परिवर्तित हो चुका है. इस दंपति ने शनिवार को उन्हें यह समझाने का प्रयास किया कि लता ने कोई नियम नहीं तोड़े हैं. वह यहां मंदिर में पिछले दो साल से आ रही हैं, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी. इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता के. सुरेंद्रन और अन्य लोग वहां पहुंचे.

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पुजारियों ने लता के पहचान पत्र में उनकी आयु की जांच करने के बाद उन्हें पवित्र मंदिर में जाने दिया. इसके बाद श्रद्धालु परिवार 18 पवित्र सीढ़ियां चढ़कर मंदिर पहुंचा और वहां दर्शन-पूजन किए. इसके बाद उन्होंने कहा कि उनके दर्शन में कुछ अवरोध आने से उन्हें दुख हुआ, क्योंकि उन्होंने भगवान अय्यप्पा मंदिर में परंपरागत रूप से जरूरी सभी विधियों को पूरा किया था. शुक्रवार को तीन महिलाओं को पुलिस सुरक्षा के बावजूद मंदिर में जाने से रोक दिया गया. मंदिर के पुजारी तंत्री ने दर्शन से प्रतिबंधित आयु वर्ग की महिलाओं द्वारा मंदिर में प्रवेश की कोशिश करने पर सबरीमाला मंदिर के द्वार बंद करने की धमकी दी है.