Women Reservation Bill Row Mallikarjun Kharge Vs Modi Speech Congress Reaction India
'भाषण में कांग्रेस 59 बार, महिलाएं गायब...', खड़गे का पीएम पर तीखा वार, जानें विपक्ष ने क्या कुछ कहा
महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद प्रधानमंत्री के संबोधन पर कांग्रेस ने कड़ा हमला बोला. मल्लिकार्जुन खड़गे, जयराम रमेश और मनीष तिवारी ने इसे राजनीतिक भाषण बताते हुए महिलाओं के मुद्दे से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया.
Congress on PM Modi Women Reservation Bill Speech: महिला आरक्षण बिल के लोकसभा में पारित न हो पाने के बाद देश की राजनीति में नया तूफान खड़ा हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे राजनीतिक हमला करार दिया है.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कड़ा बयान देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के भाषण में महिलाओं की बात कम और कांग्रेस का जिक्र ज्यादा था. उनका आरोप था कि पूरे संबोधन में कांग्रेस का नाम दर्जनों बार लिया गया, जबकि महिलाओं के अधिकारों पर बहुत कम ध्यान दिया गया. खड़गे ने इसे सरकार की प्राथमिकताओं का साफ संकेत बताया.
विपक्ष का वार
उन्होंने यह भी कहा कि एक राष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल विपक्ष पर निशाना साधने के लिए करना दुर्भाग्यपूर्ण है. उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री को यह बताना चाहिए था कि महिला आरक्षण बिल क्यों पारित नहीं हो सका, लेकिन इसके बजाय भाषण में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा दिखे.
जयराम रमेश ने क्या कहा?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी प्रधानमंत्री के संबोधन को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने इसे ‘राष्ट्रीय संबोधन’ के बजाय ‘राजनीतिक संकट का भाषण’ बताया. रमेश ने कहा कि इस तरह के संबोधन का उद्देश्य देश में एकता और विश्वास पैदा करना होता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ.
उन्होंने ये भी सवाल उठाया कि महिलाओं को आरक्षण देने के लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा. रमेश के अनुसार, सरकार को तुरंत कदम उठाते हुए मौजूदा लोकसभा ढांचे में ही महिलाओं को आरक्षण लागू करना चाहिए, न कि इसे अन्य प्रक्रियाओं से जोड़कर टालना चाहिए.
मनीष तिवारी का भी तंज
वहीं, कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रसारण का इस्तेमाल विपक्ष पर हमला करने के लिए करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. तिवारी ने इसे ‘अफसोसजनक’ बताते हुए कहा कि इस तरह की परंपरा लोकतंत्र को कमजोर करती है.
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इस पूरे विवाद की जड़ महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक है, जो लोकसभा में आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका. इस बिल का उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना था. हालांकि, इसके पारित न होने के बाद सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है.
सरकार का दावा है कि वह महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जबकि विपक्ष का कहना है कि इस मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है. दोनों पक्षों के बीच बढ़ता टकराव अब एक बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुका है. आने वाले समय में ये मुद्दा और ज्यादा गरमाने की संभावना है, क्योंकि महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर देशभर में बहस तेज हो रही है.
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