विपक्ष के भारी विरोध के बीच लोकसभा के बाद राज्यसभा (Rajya Sabha) के पटल पर किसानों से जुड़े दो विधेयक रविवार को रखे गए. कृषि मंत्री ने बिल पेश करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया तो वहीं, कांग्रेस (Congress), टीएमसी (TMS), समाजवादी पार्टी (SP) ने इसका विरोध किया. बीजेपी से साथ माने जा रहे है BJD ने भी बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की. कृषि मंत्री ने कहा कि मैं किसानों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि ये बिल न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित नहीं हैं.’ उन्होंने कहा कि यह महसूस किया जा रहा था कि किसानों के पास अपनी फसलें बेचने के लिए विकल्प होने चाहिए, क्योंकि एपीएमसी (कृषि उत्पाद बाजार समिति) में पारदर्शिता नहीं थी. Also Read - संसद के मानसून सत्र की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, कई रिकॉर्ड बने

तोमर ने कहा कि दोनों विधेयकों के प्रावधानों से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और किसानों को बेहतर कीमतें मिल सकेंगी. उन्होंने कहा कि विधेयक को लेकर कुछ धारणाएं बन रही हैं जो सही नहीं है और यह एमएसपी से संबंधित नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा है कि एमएसपी कायम है और यह जारी रहेगा.

वहीं, राज्यसभा में TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन (Derek O’Brien) ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा था कि विपक्ष किसानों को भ्रमित कर रहा है. आपके पास इसका क्या आधार है? आपने किसानों की आमदनी को डबल करने के लिए कहा था पर अब तक क्या हुआ उसका?

उधर, कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा ने आरोप लगाया कि दोनों विधेयक किसानों की आत्मा पर चोट हैं. उन्होंने कहा कि यह गलत तरीके से तैयार किए गए हैं तथा गलत समय पर पेश किए गए हैं. उन्होंने कहा कि अभी हर दिन कोरोना वायरस के हजारों मामले सामने आ रहे हैं और सीमा पर चीन के साथ तनाव है. बाजवा ने आरोप लगाया कि सरकार का इरादा एमएसपी को खत्म करने का और कार्पोरेट जगत को बढ़ावा देने का है. उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार ने नए कदम उठाने के पहले किसान संगठनों से बातचीत की थी ?

उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों विधेयक देश के संघीय ढांचे के साथ भी खिलवाड़ है. उन्होंने कहा कि जिन्हें आप फायदा देना चाहते हैं, वे इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं. ऐसे में नए कानूनों की जरूरत क्या है? उन्होंने कहा कि देश के किसान अब अनपढ़ नहीं हैं और वह सरकार के कदम को समझते हैं. बाजवा ने सवाल किया कि अगर सरकार के कदम किसानों के पक्ष में हैं तो भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी पार्टी अकाली दल क्यों इसका विरोध कर रही है? बाजवा ने बिलों पर चर्चा के दौरान बोलते हुए इसे ‘किसानों का डेथ वारंट’ बता दिया और कहा कि हमारी पार्टी किसी भी कीमत पर इस पर साइन नहीं करेगी.

वहीं, बिल पर चर्चा के दौरान सपा सांसद रामगोपाल यादव ने कहा कि, ‘ऐसा लगता है कि सत्ता पक्ष महत्वपूर्ण विधेयकों पर बहस या चर्चा नहीं चाहता है. वे केवल इन बिलों को पास कराना चाहते हैं. आपने किसी भी किसान संघों से परामर्श भी नहीं किया है.