नोएडा: आखिरकार पांच साल पहले प्रस्तावित दिल्ली के मयूर विहार-नोएडा- ग्रेटरनोएडा को जोड़ने वाला 6 लेन एलिवेटेड कॉरिडोर को हरी झंडी मिल गई. दिल्ली के मयूर विहार से शुरू होकर नोएडा-ग्रेटर नोएडा के महामाया फ्लाईओवर तक जाने वाले छह लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण का रास्ता शुक्रवार को साफ हो गया. इस कॉरिडोर की लागत 650 करोड़ रुपए है. 5.5 किलोमीटर लंबा यह गलियारा व्यस्ततम मार्ग पर यातायात को सुचारु बनाने में मदद करेगा. इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बहुत ज्यादा है.

नोएडा अधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि कॉरिडोर पर 650 करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान है और इस पर काम जनवरी 2019 से शुरू होगा और इसके 42 माह में पूरा होने की उम्मीद है. परियोजना की आधी लागत का वहन नोएडा अधिकरण करेगा, जबकि शेष खर्च उत्तर प्रदेश सरकार करेगी.

नोएडा अथॉरिटी की प्रमुख आलोक टंडन ने एक बयान में कहा कि दिल्ली के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग से 4 दिसंबर को एनओसी मिलने के बाद मामले को UTTIPEC की गवर्निंग बॉडी की 58वीं बैठक में रखा गया और पास कर दिया गया.

एलिवेटेड रोड से अक्षरधाम, मयूर विहार परी चौक, कालिंदी कुंज और सरिता विहार के ट्रैफिक को आसान बनाने में मदद मिलेगी.एलिवेटेड रोड नोएडा के सेक्टर 14ए, 15, 15ए, 16, 18 और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे से पहले महामाया फ्लाइओवर को जोड़ेगा.

वर्तमान में यह ट्रैफिक दादरी- नोएडा लिंक रोड से गुजरता है, जिसमें अधितकर समय में भारी जाम का सामना करना पड़ता है. एलिवेटेड रोड के बन जाने से दादरी-नोएडा लिंक रोड की भीड़भाड़ में कमी आएगी. टंडन के बयान के मुताबिक, यूपी स्टेट ब्रिज कॉर्पोरेशन इस प्रोजेक्ट के लिए एग्जीक्यूटिंग एजेंसी होगी. इसका निर्माण 2023 के बीच तक होना तय है.
एलिवेटेड कॉरिडोर दिल्ली के मयूर विहार फ्लाइओवर से माहामाया फ्लाइओवर के पास शहदरा ड्रेन तक बनना है. इसकी फजिबिलिटी स्टडी 2013 में तैयार हुई थी और इस यूटीटीआईपीईसी के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया था. एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिल पाने की वजह से इसे हरी झंडी नहीं मिली थी.

इसके लिए दिल्ली के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग से एनओसी मिलना थी. यूनिफाइड ट्रैफिक एंड ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रस्ट्रक्चर (प्लानिंग एवं इंजीनियरिंग) सेंटर (UTTIPEC) एक एजेंसी है, जिसका गठन दिल्ली विकास प्राधिकरण ने किया था. यह किसी भी ऐसे प्रोजेक्ट का परीक्षण करता है, जिसका असर दिल्ली-एनसीआर के ट्रैफिक पर पड़ता है.