World Environment Day 2020 : भारत और चीन दुनिया के दो सबसे बड़े आबादी वाले देश हैं और दोनों देश वैश्विक स्‍तर पर तेजी से उद्योगिक विकास की दौड़ में हैं. लेकिन जितनी तेजी ये दोनों देश विकास की पटरी पर दौड़ रहे हैं, पर्यावरण संबंधी उतनी ही गंभीर समस्‍याएं दोनों देशों के सामने खड़ी हैं. दोनों को तेज विकास केे साथ पर्यावरण के संरक्षण के लिए गंभीर जिम्‍मेदारी भी निभानी होगी. आइए यहां संक्षिप्‍त में जानते हैं कि दोनों देशों के सामने पर्यावरण का मुद्दा कितना ज्‍वलंत है और भारत और उसका पड़ोसी चीन पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या करते हैं… Also Read - लद्दाखवासी कहते हैं चीन ने हमारी जमीन ली और प्रधानमंत्री कहते हैं नहीं, कोई तो झूठ बोल रहा है: राहुल

पर्यावरण को लेकर दोनों पड़ोसी देशों भारत और चीन के बीच कई लिखित समझौतें भी हो चुके हैं, जिनमें दोनों देशों साझे के ग्लेशियरों के संरक्षण, ऊर्जा, कृषि, वनीकरण आदि शामिल हैं. लेकिन दोनों के देशों के बीच सीमा विवाद और कुछ मुद्दे प्रमुख बाधाएं हैं. बता दें चीन और भारत अपनी सीमाओं के भीतर और उससे आगे प्राकृतिक संसाधनों का उपभोग करते हैं, जो बड़े पैमाने पर भविष्य के पर्यावरण, सामाजिक और आर्थिक परिणामों को तय करेगा. Also Read - इतिहास गवाह है कि विस्तारवादी ताकतें या तो हार गईं या वापस लौटने के लिए मजबूर हुईं हैं: PM मोदी

बता दें कि दुनिया की कुल 7.7 अरब आबादी का 37 फीसदी हिस्‍सा दोनों देश भारत और चीन में रहता है. चीन में जहां  1.43 अरब लोग रहते हैं, वहीं भारत चीन से थोड़ा ही पीछे 1.37 अरब है. विश्‍व में कॉर्बन उत्‍सर्जन के मामले में चीन जहां  पूरी दुनिया में सबसे अधिक 28 फीसदी CO2 का उत्‍सर्जन करता है, वहीं भारत तीसरे स्‍थान पर 7 फीसदी के साथ खड़ा  है, जबकि दूसरे स्‍थान पर अमेरिका है, जो 14 फीसदी कॉर्बन गैस का उत्‍सर्जन करता है. Also Read - राष्‍ट्रपति शी के नेतृत्व में चीन ने भारत के प्रति आक्रामक विदेश नीति अपनाई है: US आयोग की रिपोर्ट

जल प्रदूषण के मामले में भारत ग्‍लोबल रैंकिंग में 145 वें स्‍थान पर था और स्‍कोर 15.80 जबकि चीन 47 वी रैंक के साथ 68.24 पर था. भारत भी जल समस्‍या की गंभीर स्‍थ‍िति से गुजर रहा है. दो साल पहले नीति आयोग की रिपोर्ट में कहा गया था कि साफ पानी नहीं मिलने से दो लाख लोगों की मौत हो जाती है.

बता दें कि चीन के 85% भूजल को “खराब” या “बहुत खराब” बताया गया था. चीन के पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्रालय के एक 2018 के अध्ययन के अनुसार, चीन के भूजल स्टेशनों में केवल 10% ने “अच्छा” या “उत्कृष्ट” पानी की गुणवत्ता बताई गई थी.

जनसंख्‍या और आबादी के लिहाज से लगभग बराबरी पर खड़े इन दोनों देशों में पर्यावरण की समस्‍याएं लगभग एक जैसी हैं, जिसमें वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, भूमि और वनों का संरक्षण सामने हैं. दोनों देशों ने पर्यावरण की संरक्षण के लिए कई कदम उठाए हैं.

भारत ने पर्यावरण के मद्देजर उठाए ये कदम
– भारत: भारत ने पर्यावरण की दिशा में अब इंडस्‍ट्रियल प्रदूषण के मॉनिटरिंग सिस्‍टम तैयार किया
– हर इंडस्‍ट्री को एक पॉल्‍यूशन उत्‍सर्जन का मीटर लगाना होगा, जिससे पता चलेगा कि उसने कितना कार्बन उत्‍सर्जन किया
– भारत ने जल स्‍वच्‍छता के लिए नमामि गंगे जैसे प्रोजेक्‍ट पर काम कर रही है
– भारत ने वाहनों में बीएस6 अनिवार्य किया गया है
– भारत सरकार ने जल के संरक्षण, स्‍वाच्‍छता और आपूर्ति को लेकर जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया है
– भारत सरकार और राज्‍य सरकारें बड़ी संख्‍या में वृक्षारोपण किया जा रहा है
– भारत सरकार ने कोयले से निकली राख का उपयोग शुरू किया है
– भारत में प्‍लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया गया है
– ग्रीन इनर्जी, रिन्‍यूबेल इनर्जी को भारत सरकार बढ़ावा दे रही है
– सोलर इनर्जी का उत्‍पादन भी भारत ने बढ़ाया है और आम लोगों की इसमें छूट भी दी जा रही है
– वाहनों के प्रदूषण पर जुर्माना राशि बढ़ाई है
– भारत इलेक्‍ट्र‍िक वाहनों को प्रोत्‍साहन की नीति तैयार की है

पर्यावरण की दिशा में चीन के अहम कदम
चीन स्वच्छ अर्थव्यवस्था उपायों में 75 बिलियन हर वर्ष का निवेश कर रहा है
2020 में समाप्त होने वाली चीन की 10 साल की योजना स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं पर 75 से 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर
प्रति वर्ष खर्च करने की है.
– चीन ने इंडस्‍ट्रियल प्रदूषण के मॉनिटरिंग सिस्‍टम तैयार किया गया है
– चीन ने कोल की खपत में बहुत बड़ी खपत में कटौती की है
– चीन ने कोयला आ‍धारित पॉवर प्‍लांट काफी कम कर दिए हैं
– चीन पूरी दुनिया में जितने कोयले की खपत होती थी, उसका आधा हिस्‍सा चीन उपयोग करता था
– चीन सौर ऊर्जा और विंड इनर्जी के क्षेत्र को बहुत अधिक बढ़ावा दिया है
– चीन ने इलेक्‍ट्र‍िक वाहनों के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ चुका है

दोनों देश दो साल पहले यहां थे
ईपीआई रैंकिंग में भारत और चीन यहां थे
भारत : ईपीआई रैंकिंग- 177
एन्‍वायर्नमेंट परफॉर्मेंस इक्‍स: 30. 50
पर्यावरण स्‍वास्‍थ्‍य : 9.32
पारिस्थितिकी तंत्र जीवन शक्ति: 44.74

चीन: ईपीआई रैंकिंग- 120
एन्‍वायर्नमेंट परफॉर्मेंस इक्‍स: 50 . 74
पर्यावरण स्‍वास्‍थ्‍य : 31.72
पारिस्थितिकी तंत्र जीवन शक्ति: 63.42

भारत चीन जनसंख्‍या 2019
भारत की आबादी :1.37 अरब
चीन की आबादी : 1.43 अरब

अर्थव्‍यवस्‍थाएं
चीन: $14.3 ट्रिलियन
भारत $3.202 ट्रिलियन

-भारत सरकार ने साल 2014 से अब तक 13,209 वर्ग किलोमीटर वन अच्‍छादित क्षेत्र में वृद्ध‍ि की है