चीन ने 70 के दशक में देश में बढ़ती जनसंख्या पर लगाम लगाने के लिए सख्ती से वन चाइल्ड पॉलिसी लागू की. इस पॉलिसी के बाद देश में 40 करोड़ बच्चों को जन्म लेने से रोक दिया गया. 2010 की जनगणना के अनुसार चीन की जनसंख्या एक अरब 34 करोड़ थी. 2000 से चीन की जनसंख्या 5.84 की दर से बढ़ी, इसी दौरान भारत में जनसंख्या की वृद्धि दर 17.70 प्रतिशत थी. यूनाइटेड नेशन की रिपोर्ट के मुताबिक ठीक 6 साल बाद यानी 2024 तक हम जनसंख्या के मामले में चीन को पीछे छोड़ देंगे. क्षेत्रफल के लिहाज से चीन भारत से तीन गुना बड़ा देश है. इसका मतलब यह है कि जहां भारत में पर स्क्वायर किलोमीटर में 450 लोग रहते हैं वहीं चीन में 148 लोग. चीन की जनसंख्या तेजी से घट रही है. चीन 2050 और 2100 तक अपनी प्रजनन दर 1.2 पर बनाए रखता है तो उसकी जनसंख्या भारत की आबादी का क्रमश : 65 प्रतिशत और 32 प्रतिशत रह जाएगी.

पड़ोसी देशों से कितने अलग
भारत ने 1951-52 में पहली फैमिली प्लानिंग स्कीम लागू की थी. यह दुनिया की पुरानी फैमिली प्लानिंग में से एक है. इस दौरान की पीढ़ी ‘हम दो हमारे दो’ के नारे के साथ पली बढ़ी. जनसंख्या के मामले में भारत अपने पड़ोसी देशों की तुलना में कमोबेश वैसा ही है. पाकिस्तान में टीएफआर 3.55, बांग्लादेश में 2.14 और नेपाल में 2.17 है. टीएफआर का अर्थ है कि जीवनकाल में एक महिला औसतन कितने बच्चे पैदा करती है. इस मामले में केवल भूटान अपने पड़ोसी देशों से अलग है. भूटान लिविंग स्टैंडर्ड सर्वे के अनुसार यहां टीएफआर 1.9 है. इसका मतलब यह है कि भूटान अपने यहां जनसंख्या को नियंत्रित करने में कामयाब रहा है.

फैमिली प्लानिंग का क्या हुआ
फैमिली प्लानिंग को लेकर पिछले साल सरकार ने मिशन परिवार विकास लॉन्च किया. पहली बार फैमिली प्लानिंग को हेल्थ के अलावा सामाजिक मुद्दा भी माना गया. नसबंदी लंबे समय तक फैमली प्लानिंग का मुख्य फोकस रहा है. 77 प्रतिशत महिलाएं नसबंदी को चुनती है. इसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि फैमिली प्लानिंग के दूसरे तरीके उतने कारगार नहीं हैं, या ये कहें कि वे सुविधाजनक नहीं है.

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे NFHS-4 के डाटा के मुताबिक 53.5 प्रतिशत कपल बर्थ कंट्रोल के लिए आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि नसबंदी अब भी पहले नंबर है. लेकिन भारतीय पुरुषों की तुलना में इसकी जिम्मेदारी महिलाओं के कंधों पर ही है.

कहां खड़े हैं हम
दुनिया के प्राचीन फैमिली प्लानिंग प्रोग्राम के बाद भारत ने क्या हासिल किया. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 के अनुसार 2015-16 में भारत में टीएफआर (एक महिला औसतन कितने बच्चे पैदा करती है) 2.2 था. जबकि 2005-06 में यह 2.7 था. 53.5 प्रतिशत कपल फैमिली प्लानिंग के लिए आधुनिक बर्थ कंट्रोल मेरजमेंट का इस्तेमाल करते हैं. इनमें 36 प्रतिशत महिलाएं नसबंदी कराती हैं वहीं पुरुषों में नसबंदी का प्रतिशत मात्र 0.3 प्रतिशत ही है. हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम और हेल्थ मिनिस्ट्री का कहना है कि नसबंदी कराने वाले लोगों की संख्या में 10.1 प्रतिशत की कमी आई है.

चीन से लगभग 20 साल पहले फैमली प्लानिंग स्कीम लॉन्च करने के बाद भी भारत में जनसंख्या की दर बढ़ रही है. 2024 तक हम चीन को पीछे छोड़ दुनिया की सर्वाधिक आबादी वाला देश बन जाएंगे. सीमित संसाधनों में इतनी बड़ी आबादी की सुविधाओं का ख्याल रखना भारत के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है.