नई दिल्ली: हर साल 19 नवंबर को विश्व शौचालय दिवस (World Toilet Day) मनाया जाता है. दुनिया के लिए ये बेहद ही अहम दिन माना जाता है. खासतौर पर भारत जैसे विकासशील देश के लिए जहां आज भी कई ऐसी जगहें हैं जहां पर शौचालय जैसी बेसिक जरूरत की कमी है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाए गए स्वच्छ भारत अभियान का खासा प्रभाव देखने को मिल रहा है. स्वच्छ भारत मिशन के तहत केन्द्र सरकार ने एक करोड़ शौचालय बनाने की घोषणा की थी. प्रधानमंत्री मोदी का दावा है कि भारत के 90 फीसदी घरों में शौचालय है, जिनमें से तकरीबन 40 फीसदी 2014 में नई सरकार के आने के बाद बने हैं. वहीं संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार दुनिया की तकरीबन ढाई अरब आबादी को आज भी ठीक से शौचायल उपलब्ध नहीं है और वे गंदगी में रहने को मजबूर हैं. इसमें सबसे ज्यादा संख्या भारत की है. हालांकि हमारे देश में स्वच्छात के प्रति जागरूकता की लौ बापू जी ने बहुत पहले ही जला दी थी. बापू जी का कहना था, हर व्यक्ति को खुद कि सफाई का ध्यान रखना चाहिए.

वैसे तो इस दिशा में भारत सरकार के कई प्रयास जारी हैं लेकिन आज हम आपको विश्व शौचालय दिवस के बारे में कुछ अनोखी बातें बताने जा रहे हैं.

2001 में हुई थी शुरुआत
विश्व शौचालय दिवस की शुरुआत विश्व शौचालय संगठन द्वारा 2001 में हुई थी. हालांकि तब से कई सालों तक इसका कोई खास प्रभाव देखने को नहीं मिला था. 2013 से लोग इस संगठन के बारे में अधिक जागरुक हुए और भारत में 2014 में बनी नरेंद्र मोदी सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन चलाकर इसे एक अलग ही तेजी दे दी.

कुत्तों के लिए यहां हैं अलग शौचालय
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो चीन में कुत्तों के लिए अलग से सार्वजनिक शौचालय होता है.

फ्लश न करने पर लगता है जुर्माना
सिंगापुर एक ऐसा देश है जहां टॉयलेट में फ्लश नहीं करना कानूनी जुर्म माना जाता है और इसके लिए आपको जुर्माना भी भरना पड़ सकता है.

इस कंपनी ने बनाया था सबसे पहला टॉयलेट पेपर
‘द स्कॉट पेपर कंपनी’ दुनिया की पहली ऐसी कंपनी है जिसने सन 1890 में टॉयलेट पेपर एक रोल पर बनाया था.

अंग्रेजों का टॉयलेट सबसे खराब!
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 1992 में हुए एक सर्वे में ब्रिटिश टॉयलेट को दुनिया में सबसे ज्यादा खराब बताया गया था.