
Gargi Santosh
गार्गी संतोष, जी मीडिया के India.com में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह हाइपरलोकल, नेशनल और वर्ल्ड सेक्शन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. गार्गी को लाइफस्टाइल, हेल्थ, टेक्नोलॉजी, और ... और पढ़ें
दिल्ली का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में जहरीली हवा, धुंध और गंदगी की तस्वीर बनती है. हर साल, दिवाली के बाद राजधानी स्मॉग की मोटी चादर ओढ़ लेती है और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ता. एक दिन पहले यानी शनिवार को दिल्ली और उसके आसपास NCR इलाकों में नजारा बेहद खराब था, हवा की रफ्तार बेहद कम रही और स्मॉग आसमान में ही फंसा रहा. ठंड और कोहरे ने मिलकर हालात को और भी ज्यादा बिगाड़ दिया.
बता दें अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दिल्ली को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बताया जाता है, लेकिन यह पूरा सच नहीं है. दरअसल, प्रदूषण की रैंकिंग स्थायी नहीं होती – यह मौसम, हवा की दिशा, स्थानीय गतिविधियों पर निर्भर करती है. कई बार दिल्ली पहले नंबर पर होती है, तो कई बार दूसरे या तीसरे स्थान पर खिसक जाती. इसलिए यह कहना गलत होगा कि दुनिया में सिर्फ दिल्ली की हवा ही खराब है. एशिया, अफ्रीका और दूसरे हिस्सों में भी कई शहर ऐसे हैं जहां सांस लेना किसी चुनौती से कम नहीं.
2024-25 के आंकड़ों पर नजर डालें, तो पाकिस्तान का लाहौर कई बार दिल्ली से भी ज्यादा प्रदूषित पाया गया है. वहां AQI 450 से 460 तक दर्ज किया गया, जो बेहद खतरनाक स्तर है. वाहनों का धुआं, फैक्ट्रियों से निकलने वाला प्रदूषण और पराली जलाने की समस्या सर्दियों में स्मॉग बनकर शहर को जकड़ लेती है. इसी तरह बांग्लादेश की राजधानी ढाका भी अक्सर तीसरे नंबर पर रहती है, जहां AQI 316 से 318 तक पहुंच जाता है. यहां बढ़ती आबादी और अव्यवस्थित शहरीकरण बड़ी वजह हैं.
मिस्र की राजधानी काहिरा भी कई बार दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल रहती है. हालांकि यहां AQI लगभग 160 के आसपास दर्ज होता है, जो दिल्ली, लाहौर और ढाका से कम है, लेकिन फिर भी इसे स्वस्थ नहीं कहा जा सकता. इसका मतलब साफ है कि प्रदूषण सिर्फ भारत या दिल्ली की समस्या नहीं, बल्कि यह एक वैश्विक संकट है. जरूरत है कि हर देश मिलकर ठोस कदम उठाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को साफ हवा में सांस लेने का हक मिल सके.
AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स, हवा की गुणवत्ता को मापने का एक स्केल है. इसे 0 से 500 के बीच मापा जाता है. 0 से 50 के बीच AQI को अच्छा माना जाता है, जिसमें हवा पूरी तरह सुरक्षित होती है. 51 से 100 संतोषजनक, 101 से 200 मध्यम और 201 से 300 खराब की श्रेणी में आता है. 301 से 400 AQI बहुत खराब होता है, जिससे सांस, आंख और गले की दिक्कत बढ़ जाती है. 401 से 500 का स्तर गंभीर माना जाता है, जो सीधे तौर पर सेहत के लिए जानलेवा हो सकता है.
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