उत्तरकाशी: इस साल श्रद्धालुओं के लिए यमुनोत्री धाम के कपाट 18 अप्रैल को दोपहर सवा बारह बजे खोले जाएंगे. इस वर्ष 18 अप्रैल को अक्षय तृतीया भी है, इसी अवसर पर शुभ संयोग मानते हुए मंदिर के कपाट 18 अप्रैल को खोलने का फैसला किया गया है. यमुनोत्री मन्दिर समिति के उपाध्यक्ष जगमोहन उनियाल ने बताया कि यमुनोत्री धाम के कपाट 18 अप्रैल को दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर श्रद्धालुओं के लिए खोले जाने का मुहूर्त शुक्रवार को यमुना जयंती के मौके पर तीर्थ पुरोहितों ने यमुना मंदिर में बैठकर निकाला है. Also Read - सभी मौसम में चारो धाम पहुंचना जल्‍द होगा आसान, चंबा के नीचे 440 मी लंबी सुरंग बनाने में अहम कामयाबी

यमुनोत्री के मंदिर प्रांगण में एक विशाल शिला स्तम्भ है जिसे दिव्यशिला के नाम से जाना जाता है. यमुनोत्री मंदिर परिसर 3235 मीटर की उंचाई पर स्थित है. रेल मार्ग से होते हुए अंतिम रेल स्टेशन ऋषिकेश से 231 किलोमीटर और देहरादनू से 185 किलोमीटर की दूरी पर है. यमुनोत्री जाने का रास्ता बहुत कठिन है सड़क के रास्ते ऋषिकेश से बस, कार अथवा टैक्सी द्वारा नरेंन्द्र नगर होते हुए यमुनोत्री के लिए 228 किलो मीटर की दूरी तय करते हुए फूलचट्टी तक पहुंचा जा सकता है. फूलचट्टी से मंदिर तक पहुंचने के लिए 8 किलो मीटर की चढ़ाई चढ़नी पड़ती है. Also Read - उत्तराखंड के ऊपरी इलाकों में भारी बर्फबारी, बढ़ी ठंड

गंगोत्री मंदिर खोले जाने का मुहूर्त चैत्र नवरात्र आरंभ होने के अवसर पर 16 मार्च को निकाला गया था. गढ़वाल हिमालय के चार धामों के नाम से प्रसिद्ध दो अन्य मंदिरों, बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने की तिथि और समय भी निश्चित हो चुकी है. बदरीनाथ मंदिर के कपाट 30 अप्रैल को खुलेंगे, वहीं केदारनाथ के कपाट 29 अप्रैल को खुल रहे हैं. Also Read - भारत में 4 धाम के बाद अब कंबोडिया में बनेगा पांचवां धाम, मंदिर में लगेगी भगवान शिव की 180 फुट ऊंची मूर्ति

चारों धाम उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित होने के कारण सर्दियों में भारी बर्फवारी की चपेट में रहते हैं और इसलिये सर्दी के समय में इन धामों को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद कर दिया जाता है. गर्मियां आने पर मंदिरों के कपाट अप्रैल—मई के आसपास श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाते हैं.

हर साल अप्रैल-मई से अक्टूबर-नवंबर तक चलने वाली इस वार्षिक तीर्थयात्रा से गढ़वाल हिमालय में रहने वाले लोगों को आर्थिक रूप से भी मदद मिलती है.