नई दिल्ली. पूर्व केन्द्रीय मंत्रियों यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी तथा अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भारत और फ्रांस के बीच हुए राफेल लड़ाकू विमान सौदे में कथित आपराधिक कदाचार के लिये प्राथमिकी दर्ज कराने का अनुरोध करते हुए बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. इस याचिका में कहा गया है कि उनकी शिकायत में दर्शाए गए अपराधों की केन्द्रीय जांच ब्यूरो से समयबद्ध तरीके से जांच कराने और जांच की प्रगति रिपोर्ट समय समय पर शीर्ष अदालत को सौंपने का निर्देश देने का अनुरोध् किया गया है.

दोनों पूर्व केन्द्रीय मंत्रियों और प्रशांत भूषण ने चार अक्टूबर को जांच ब्यूरो के निदेशक आलोक वर्मा से मुलाकात के बाद जांच ब्यूरो में अपनी शिकायत दायर की थी. आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच चल रहे गतिरोध के मद्देनजर ही मंगलवार को इन दोनों अधिकारियों को अवकाश पर जाने का निर्देश दिया गया था.

सीबीआई में हुई थी उठापटक
आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच चल रहे गतिरोध के मद्देनजर ही मंगलवार को इन दोनों अधिकारियों को अवकाश पर जाने का निर्देश दिया गया था. ये याचिका शीर्ष अदालत द्वारा 10 अक्टूबर को दो अन्य याचिकाओं पर केन्द्र से राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया की जानकारी सीलबंद लिफाफे में मांगे जाने के दो सप्ताह बाद दायर की गयी है. इससे पहले, न्यायालय ने अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा और अधिवक्ता विनीत ढांडा की याचिकाओं पर केन्द्र से फ्रांस के साथ हुये समझौते के बारे में निर्णय लेने की प्रक्रिया की जानकारी 29 अक्टूबर तक मांगी थी. शर्मा की याचिका 31 अक्तूबर को सुनवाई के लिये सूचीबद्ध है.

पीठ ने ये स्पष्ट किया
हालांकि, प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह जानकारी मांगने के साथ ही स्पष्ट किया था कि वह इन विमानों की कीमत और तकनीकी विवरण के बारे में जानकारी नहीं चाहती है. भारत ने भारतीय वायु सेना को मजबूती प्रदान करने के इरादे से फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का समझौता किया है. राफेल लड़ाकू विमान दो इंजन वाला विमान है जिसका निर्माण फ्रांस की विमानन कंपनी दसाल्ट एविएशन करती है. भारतीय वायु सेना ने अगस्त, 2007 में 126 लड़ाकू विमानों की खरीद के लिये निविदा जारी की थी. इसके बाद इसके लिये बोली लगाने की प्रक्रिया हेतु कई विमानन कंपनियों को आमंत्रित किया गया था.

ये किया दावा
सिन्हा, शौरी और भूषण ने अपनी नई याचिका में दावा किया है कि रक्षा मंत्रालय ने 2007 में 126 लड़ाकू विमानों की खरीद के लिये टेन्डर जारी किया था और इस प्रस्ताव में साफ था कि ऐसे 18 लड़ाकू विमान उड़ान भरने वाली अवस्था में विदेश से खरीदे जायेंगे और 108 विमानों का विदेशी कंपनी के साथ तकनीक हस्तांतरण के तहत भारत में हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स लि की फैक्ट्री में निर्माण किया जायेगा. याचिका के अनुसार राफेल का निर्माण करने वाली दसाल्ट कंपनी को न्यूनतम कीमत का टेन्डर देने वाला घोषित किया गया था. इसके बाद शुरू हुयी बातचीत 25 मार्च, 2015 तक काफी आगे बढ़ चुकी थी.

याचिका में ये है
याचिका के अनुसार, इसी दौरान 15 दिन के भीतर भारत के प्रधान मंत्री और फ्रांस के राष्ट्रपति ने राफेल विमानों के बारे में एकदम नये सौदे की घोषणा की जिसमें भारत की ओर से प्रधानमंत्री भारत में विमान निर्माण की तकनीक के हस्तांतरण के बगैर ही सिर्फ 36 लड़ाकू विमान उड़ान भ्ररने वाली अवस्था में ही खरीदने पर सहमत हो गये.