नई दिल्ली: साल 2019 फिलहाल अपने आखिरी समय को जी रहा है. इस वर्ष जहां एक तरफ देश ने कई मामलों में शिखर पर अपना परचम लहराया वहीं दूसरी तरफ भारतीय राजनीति के कुछ अहम चेहरों ने अपनी जिंदगी की आखिरी सांस ली. जीना और मरना तो दुनिया का दस्तूर है मगर इन हस्तियों का गुजर जाना पूरे भारतवर्ष के लिए कभी न भूलने वाली पीड़ा है. आज हम आपको राजनीति की गलियारों से कुछ ऐसे नाम याद दिलाएंगे जिन्होंने इस साल अपनी जिंदगी के ताप को मद्धम कर दिया. Also Read - फिरोजशाह कोटला स्‍टेडियम के स्‍टैंड से नाम हटवाना चाहते हैं Bishan Singh Bedi, डीडीसीए सदस्‍यता भी छोड़ी

अरुण जेटली (Arun Jaitley: 28/12/1952-24/08/2019): Also Read - Arun Jaitley Death Anniversary: अरुण जेटली की पुण्यतिथि पर भावुक हुए PM मोदी, कहा- 'मुझे अपने दोस्त की बहुत याद आती है'

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भारतीय राजनीति का ये एक ऐसा नाम था जिसे सभी पार्टियों के नेता ‘ट्रबलशूटर’ की उपाधि से नवाजते थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने शुरुआती दिनों से हीअरुण जेटली को अपने जीवन का ‘आइडल’ मानते थे. इस पूर्व वित्त मंत्री के खराब सेहत को मद्देनजर रखते हुए भाजपा ने उन्हें दूसरे कैबिनेट से बाहर रखने का फैसला किया था. जेटली 1991 से भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य थे. वह 1999 के आम चुनाव से पहले की अवधि के दौरान भाजपा के प्रवक्ता बन गए थे. 9 अगस्त 2019 को, उन्हें “सांस फूलने” की शिकायत के बाद गंभीर हालत में एम्स, नई दिल्ली में भर्ती कराया गया था. काफी वक्त तक जिंदगी से लड़ते जेटली ने आखिर 24 अगस्त 2019 को 66 साल की उम्र में 12:07 अपराह्न बजे अपना प्राण त्याग दिया.

सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj-14/02/1952-06/08/2019):

भारतीय राजनीति की एक ऐसी महिला जिसने अपनी बेबाकी से हर मुश्किलों का सामना किया. सुषमा स्वराज ने 6 अगस्त को अंतिम सांस ली. मंत्री स्वराज, ने पिछले साल घोषणा की थी कि वह 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी और जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को रद्द करने के सरकार के फैसले के लिए ट्विटर पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देने के कुछ ही घंटे बाद इनका निधन हो गया.  दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री और देश में किसी राजनीतिक दल की पहली महिला प्रवक्ता बनने की उपलब्धि भी इनके नाम दर्ज है. विदेश मंत्रालय (MEA) के लिए एक ‘मानवीय’ स्पर्श लाने के लिए प्रसिद्ध सुषमा की मृत्यु ने पूरे देश को सदमे में छोड़ दिया है.

मनोहर पर्रिकर (Manohar Parrikar-13/12/1955-17/03/2019):

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) का पहला छात्र जिसने मुख्यमंत्री पद को संभाला.मनोहर पर्रिकर की मृत्यु कैंसर की वजह से हुई और इससे पहले तक वो गोवा के मुख्यमंत्री पद पर काबिज थें.आईआईटी-बॉम्बे के पूर्व छात्र, पर्रिकर केंद्रीय रक्षा मंत्री थे जब वे मार्च 2017 में गोवा के मुख्यमंत्री के रूप में वापस आए. रक्षा मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय सेना ने म्यांमार और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया. वह भारत और फ्रांस के बीच विवादास्पद राफेल सौदे के एक मजबूत समर्थक भी थे.

शीला दीक्षित (Sheila Dikshit- 31/03/1938-20/07/2019):

भारतीय राजनीति की इतिहास में एक ऐसी महिला जिसकी जिंदादिली की पूरी दुनिया कायल थी. शीला दीक्षित किसी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश (UT) की सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाली मुख्यमंत्री थीं. मृत्यु के समय वो दिल्ली कांग्रेस की अध्यक्ष की भूमिका निभा रही थीं. वे दिल्ली की दूसरी महिला मुख्य मंत्री थीं, तथा देश की पहली ऐसी महिला मुख्यमंत्री थीं जिन्होंने लगातार तीन बार मुख्यमंत्री पद संभाला. सांसों में रुकावट आने से शीला दीक्षित ने 20 जुलाई को इस दुनिया को अलविदा कह दिया.

जॉर्ज फर्नान्डिस (George Fernandes- 03/06/1930-29/01/2019):

अपने अंदाज के लिए मशहूर राजनेताजॉर्ज फर्नांडिस 89 साल की उम्र में दुनिया से रुखसत ले लिया.आपातकाल के दौरान जॉर्ज फर्नांडीस 1999 में कारगिल युद्ध के समय केंद्रीय रक्षा मंत्री थे.फर्नांडिस एक पत्रकार भी थें. वे भारत के केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में रक्षा मंत्री, संचारमंत्री, उद्योगमंत्री, रेलमंत्री आदि के रूप में कार्य कर चुके थे. चौदहवीं लोकसभा में जॉर्ज फ़र्नान्डिस मुजफ़्फ़रपुर से जनता दल के टिकट पर सांसद चुने गए थे. काफी समय से बीमार चल रहे फर्नांडिस ने 29 जनवरी को अपनी आखिरी सांस ली थीं.

इस साल गुजरने वाले राजनेताओं की फेहरिश्त लंबी है मगर इन प्रमुख चेहरों ने भारतीय राजनीति को मजबूत और पाकीजा बनाने के लिए सैदव मेहनत की है.