नई दिल्ली: पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रसिद्ध संगीतकार-गायक भूपेन हजारिका और भारतीय जनसंघ के नेता एवं समाजसेवी नानाजी देशमुख को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ प्रदान किया जाएगा. वर्ष 2015 में नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक मदन मोहन मालवीय को इस सम्मान से नवाजा गया था.

इस बीच इस पर विवाद भी शुरू हो गया है. योग गुरु बाबा रामदेव ने सवाल किया है कि आजादी के 70 साल बाद भी किसी संन्यासी को यह सर्वोच्च सम्मान क्यों नहीं दिया गया है? उन्होंने मांग की है कि अगला भारत रत्न किसी सन्यासी को मिले. योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा, दुर्भाग्य है कि 70 सालों में एक भी संन्यासी को भारत रत्न नहीं मिला. चाहे वह महर्षि दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद हों या शिवकुमार स्वामी जी. मैं भारत सरकार से आग्रह करता हूं कि अगली बार कम से कम किसी संन्यासी को भी भारत रत्न दिया जाना चाहिए.

जनता दल (सेकुलर) के नेता दानिश अली ने शुक्रवार को कहा कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी नागपुर में आरएसएस मुख्यालय में एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे, इसलिए उन्हें भारत रत्न सम्मान दिया जा रहा है. जेडीएस महासचिव ने मुखर्जी को भारत रत्न दिये जाने और कर्नाटक के सिद्धगंगा मठ के शिवकुमार स्वामी को यह सम्मान नहीं दिये जाने पर भी ऐतराज जताया. शिवकुमार स्वामी का हाल ही में 111 साल की आयु में निधन हो गया था. उन्होंने कहा, ‘प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि वह संघ मुख्यालय गये और संघ के संस्थापक सरसंघचालक के बी हेडगेवार को धरती का पुत्र’ बताया था.