नोएडा. राजनीति में अर्श से फर्श तक का सफर तय करने में दो महीने की अवधि कोई खास नहीं मानी जाती, खासकर तब जब लोगों के जबर्दस्त समर्थन से सत्ता हासिल की गई हो लेकिन, उत्तर प्रदेश में ऐसा होता दिख रहा है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार के ‘हनीमून पीरियड’ पर राज्य में ताबड़तोड़ होने वाले अपराधों की श्रृंखला ने ग्रहण लगा दिया है। इन दो महीनों में ही गंभीर अपराधों का ग्राफ बहुत तेजी से ऊपर गया है, कई मामलों में तो कई गुना बढ़ गया है। Also Read - योगी आदित्यनाथ का वादा, 'कोरोना खत्म होने पर हर गांव के व्यक्ति को कराएंगे अयोध्या में कारसेवा'

चुनाव से पहले बीजेपी ने कहा था कि समाजवादी पार्टी सरकार के शासन में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है और उसने वादा किया था कि वह इसे फिर से बहाल करेगी। नारा ही यही था ‘न गुंडाराज न भ्रष्टाचार, अबकी बार भाजपा सरकार’। सत्ता विरोधी लहर पर सवार बीजेपी तीन-चौथाई बहुमत से सत्ता में आई। लेकिन, दो महीने से भी कम समय में हालात सत्तारूढ़ बीजेपी के खिलाफ जाने लगे हैं। हत्या, दुष्कर्म, डकैती, जातिगत और सांप्रदायिक संघर्ष, कुछ बचा नहीं है होने से। सरकार बेतहाशा बढ़ते अपराध और लोगों के डिग रहे विश्वास के सामने लड़खड़ाती दिख रही है। Also Read - सीएम योगी के गोरखपुर में रेलवे के शौचालय में लगाए हरे-लाल टाइल्स, सपा कार्यकर्ताओं ने कालिख पोती, विरोध प्रदर्शन

हालात कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट को भी राज्य में अपराध की स्थिति पर चिंता जतानी पड़ी। एक याचिका की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी. बी. भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने प्रधान सचिव (गृह) और पुलिस महानिदेशक को अपराध और माफिया तत्वों पर लगाम लगाने का निर्देश दिया। Also Read - फिल्म सिटी के बाद अब उप्र में बनेगा पहला डाटा सेंटर पार्क, 600 करोड़ रुपये की परियोजना को मिली मंजूरी

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री की सत्ता संभालने के बाद योगी आदित्यनाथ ने बड़े बड़े दावे किए थे. अपराधी या तो अपराध छोड़ दे या उत्तर प्रदेश की सीमा, जैसे बयान देकर योगी ने अपने सीएम के सफर की शुरुआत की थी. लेकिन योगी के तमाम दावे और प्रशासनिक सख्ती के बावजूद प्रदेश में जो घट रहा है वह उनकी साख पर सवाल पैदा कर रहा है. योगी के पद संभालने के बाद से एक के बाद एक कई सख्त फैसलों ने हलचल मचाई लेकिन अपराध पर हालात जस के तस बने हुए नजर आ रहे हैं. आइए जानते हैं उन घटनाओं के बारे में, जिन्होंने योगी की चिंता बढ़ा दी हैं.

मथुरा में ज्वैलर्स का मर्डरः 15 मई को मथुरा के होली गेट स्थित मयंक चेन्स नाम की ज्वैलर्स की दुकान में ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर दो सराफा व्यवसायियों मेघ अग्रवाल और विकास अग्रवाल की हत्या कर दी गई और 4 करोड़ की लूट को अंजाम दिया गया. इसके बाद बदमाश चौबियापाड़ा की ओर भागते हुए फरार हो गए थे. योगी सरकार के लिए यह घटना सबसे भयानक स्वप्न साबित हुई. इस घटना के सीसीटीवी वीडियो ने सभी को दहलाकर रख दिया. सरकार के खिलाफ राज्यभर में प्रदर्शनों की शुरुआत हुई. ज्वैलर्स के अंतिम संस्कार में शामिल होने श्मशान पहुंचे बीजेपी कार्यकर्ताओं और स्थानीय विधायक और प्रदेश में मंत्री श्रीकांत शर्मा के भाई को दौड़ा दिया गया.

आखिरकार मंत्री खुद मथुरा पहुंचकर पीड़ितों से मिले. मथुरा में दो व्यापारियों की हत्या ने सत्तारूढ़ खेमे की चिंता इस हद तक बढ़ा दी कि घटना के 24 घंटे के अंदर 67 आईपीएस अफसरों का तबादला कर दिया गया। घटना के 5 दिन बाद पुलिस ने कारोबारी की हत्या व लूटकांड में 6 आरोपी को चौबियापाड़ा के हनुमान गली से गिरफ्तार कर लिया है। इनमें से एक बदमाश को उसी घटना के दौरान गोली भी लगी. अपराधियों के पकड़े जाने के बाद भी अपराध को लेकर लोगों के दिलों में दहशत बनी हुई है. योगी सरकार के एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ने माना कि फिलहाल लोगों का विश्वास आदित्यनाथ सरकार को लेकर हिल गया है। उन्होंने कहा, ‘निश्चित ही, बढ़ते अपराध हमारी सबसे बड़ी चुनौती हैं और हम राज्य में अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए पर्याप्त कदम उठा रहे हैं।’

सहारनपुर का खूनी संग्रामः उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में अप्रैल महीने में अंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में निकली शोभायात्रा के दौरान जमकर उपद्रव हुआ. दो पक्षों में हुए टकराव में जमकर पत्थरबाजी, आगजनी, फायरिंग व लूटपाट हुई. इस उपद्रव में स्थानीय सांसद राघव लखनपाल शर्मा, एसएसपी लव कुमार और कई अन्य लोग घायल हो गए. अप्रैल की इस घटना के बाद मई में जो कुछ हुआ, उसकी कल्पना खुद योगी ने नहीं की होगी. 5 मई को सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में ठाकुरों और दलितों के बीच खूनी संघर्ष हुआ. 55 दलितों के घर जलाए जाने का मामला पूरे देश में गूंजा। अब तक इस हिंसा में 2 जानें जा चुकी हैं. ऐसे में गैर बीजेपी दलों के नेता दलित वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए शब्बीरपुर हिंसा को लेकर बीजेपी सरकार की घेराबंदी कर रहे हैं.

जेवर में 4 महिलाओं से रेपः जेवर क्षेत्र के साबौता गांव के पास 24 मई की रात बीती रात हथियारबंद आधा दर्जन बदमाशों ने एक कार कार में सवार होकर जा रहे एक परिवार के साथ लूटपाट की. विरोध करने पर बदमाशों ने परिवार के मुखिया की गोली मारकर उसकी हत्या कर दी और कार में सवार चार महिलाओं के साथ बलात्कार किया। समाचार एजेंसी भाषा के हवाले से यह खबर मिली है. इस घटना ने बुलंदशहर राजमार्ग पर हुई लूट और बलात्कार की घटना की याद को ताजा कर दिया है. अखिलेश सरकार के काल में हुई उस घटना पर समाजवादी पार्टी सरकार की खूब किरकिरी हुई थी. तमाम राजनेता पीड़ितों के प्रति संवेदना प्रकट करने उनके घर पहुंचे थे.

राज्य पुलिस की तरफ से जारी आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। इस साल 15 मार्च से 15 अप्रैल के बीच ही दुष्कर्म के मामले बीते साल के मुकाबले चार गुना बढ़े हैं और हत्या के मामलों में दोगुने से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल समान अवधि में राज्य में 101 हत्याएं हुई थीं। इस बार 240 हुई हैं। राज्य सरकार ने हालात पर काबू पाने के लिए बीते दो महीने में 200 आईपीएस अफसरों के तबादले किए लेकिन कोई लाभ होता दिख नहीं रहा है।

राज्य के सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक के. एल. गुप्ता का कहना है कि हालात पर काबू पाया जा सकता है अगर पुलिस को उसका काम करने दिया जाए और उसके काम में राजनीतिक दखलंदाजी न्यूनतम हो। उन्होंने कहा कि जरूरत इस बात की है कि पुलिस पहल लेकर कार्रवाई करे। विपक्ष की संख्या विधानसभा में बहुत कम है। लेकिन, अपराध के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को सदन में घेरा। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन को भरोसा दिलाया कि राज्य में कानून का राज होगा, अपराधियों से अपराधियों जैसा ही बर्ताव होगा और ऐसे तत्वों को राजनीतिक संरक्षण की अनुमति नहीं दी जाएगी।

योगी सरकार के आने के बाद से अब तक हुई बड़ी आपराधिक वारदातें

17 मई, 2017: लखनऊ में कर्नाटक कैडर के आईएएस अफसर का मर्डर
15 मई, 2017: मुजफ्फरनगर में किसान की हत्या से हड़कंप
13 मई, 2017: कौशांबी में नवविवाहिता की रेप के बाद हत्या
12 मई, 2017: अलीगढ़ में गोकशी के आरोप में 6 लोगों की पीट-पीटकर हत्या
9 मई, 2017: लखनऊ में रिटायर्ड सूबेदार की दो बेटियों की हत्या
5 मई, 2017: ग्रेटर नोएडा में गोकशी के आरोप में 2 लोगों की पिटाई
24 अप्रैल, 2017: इलाहाबाद में माता-पिता और दो बेटियों की हत्या
5 अप्रैल, 2017: मुजफ्फरनगर में बीजेपी नेता की गोली मारकर हत्या

(आईएएनएस से प्राप्त जानकारी के साथ)