मुंबई। उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने बीफ पार्टी और किस इवेंट आयोजित करने वालों को नसीहत दी है. इसके अलावा उन्होंने संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी के विरोध में होने वाले कार्यक्रमों को लेकर भी अपनी नाराजगी जताई. मुंबई में हुए एक कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने दोनों मामलों पर खुलकर अपनी राज जताई. अपने भाषण के दौरान उप राष्ट्रपति कहा, आप बीफ खाना चाहते हैं, खाइए. लेकिन फेस्टिवल क्यों मना रहे हैं? इसी तरह किस फेस्टिवल का मामला है, अगर आप किसी को किस करने चाहते हैं तो इसके लिए किसी फेस्टिवल या इजाजत की क्या जरूरत है. Also Read - वैश्विक भूख सूचकांक में भारत का 102वां स्थान चिंता का विषय: उपराष्ट्रपति

मुंबई में इस कार्यक्रम के दौरान उप राष्ट्रपति ने इस दौरान संसद हमले के आरोपी अफजल गुरु का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, इसी तरह अफजल गुरु को लीजिए. आजकल लोग उसकी माला जप रहे हैं. ये क्या हो रहा है? उसने संसद को उड़ाने की कोशिश की थी.

उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू मुंबई स्थित आरए पोद्दार कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकॉनमिक्स के प्लैटिनम जुबली प्रोग्राम में बोल रहे थे. उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद अभिभावको, अध्यापकों से घर और कॉलेज में तनावरहित माहौल बनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ माता-पिता अपने बच्चों की क्षमता को सही से समझ नहीं पाते हैं.

देश के विघटन की इजाजत नहीं

उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, लेकिन दूसरों के अधिकारों की भी रक्षा के लिए इसे नियमित करने की आवश्यकता है. उप राष्ट्रपति ने कहा कि असहमति स्वीकार्य है, लेकिन देश के विघटन की इजाजत नहीं दी जा सकती.को यह समझ लेना चाहिए. कोई देश विघटन स्वीकार नहीं कर सकता. कुछ चीजें हैं जो मुझे चिंतित करती हैं. देश में 740 विश्वविद्यालय हैं. इनमें से 730 बेहद शांतिपूर्ण हैं. केवल कुछ ही विश्विवद्यालयों में थोड़ी समस्याएं हैं. वे अनावश्यक विवादों को ले कर सुर्खियों में हैं.

उपराष्ट्रपति ने कहा कि कहीं एक विश्विवद्यालय में बीफ फेस्टिवल आयोजित किया गया. अगर आप खाना चाहते हैं, आप खा सकते हैं, लेकिन कॉलेज में क्यों फेस्टिवल आयोजित करें और दूसरों की भावनाएं आहत करें? कुछ छात्र हैं जिन्होंने आतंकवादी अफजल गुरू की तारीफ तक की. उन्होंने दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू युनिवर्सिटी में भारत के विघटन के नारों की चर्चा करते हुए कहा कि हमारे पड़ोसियों में से एक की तरफ से आतंकवादियों की मदद, उकसावा, वित्तपोषण और प्रशिक्षण की पृष्ठभूमि में विघटन की चर्चा हुई है. वेंकैया ने कहा कि मुझे मुंबई के लोगों को आतंकवाद के खतरे बताने की जरूरत नहीं है जो 26/11 आतंकवादी हमले से गुजरे हैं.