नई दिल्ली। कश्मीर में पत्थरबाजी कराने वालों की एक और साजिश का खुलासा हुआ है. यूपी के बागपत और सहारनपुर के दो युवकों को पत्थरबाजी के लिए ऑफर दिया गया था. इन्हें नौकरी के लिए बुलाया गय़ा था लेकिन कुछ समय बाद पत्थरबाजी के लिए भी मजबूर किया गया. इनका कहना है कि फैक्टरी का मालिक पत्थरबाजी के लिए मजबूर करता था.

टेलर की नौकरी का वादा किया था

खबर के मुताबिक दोनों यूवकों को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में 20 हजार रुपये महीने की सैलरी पर टेलर की नौकरी पर रखने का वादा किया गया था. लेकिन नौकरी देने वाले ने इन्हें पत्थरबाजी की ट्रेनिंग लेने के लिए मजबूर किया. हमें कश्मीरी कपड़े पहनाकर सेना पर पत्थरबाजी कराई जाती थी. मना करने पर धमकी दी जाती थी. फैक्टरी मालिक पत्थरबाजी करने पर मजबूर करता था. अब पुलिस इस मामले की जांच में जुटी हुई है.

पत्थरबाजी की ट्रेनिंग देने लगे

इन दोनों ने कहा कि हमसे टेलरिंग का काम लेने के बजाए पत्थरबाजी में झोंक दिया गया. इनमें से एक युवक ने कहा, शुरूआत में दो-तीन महीने तक टेलरिंग का काम कराया गया. लेकिन मैं संतुष्ट नहीं था. घर लौटने की बात कहने पर चोरी के मामले में फंसाने की धमकी दी गई. बहरहाल, यूपी पुलिस ने मामले की जांच बागपत के एसपी और सहारनपुर के एसएसपी को सौंपी है.

पत्थरबाजी के मामलों में तेजी  

बता दें कि कश्मीर में पिछले कुछ सालों में पत्थरबाजी के मामलों में खासी तेजी आई है. हर मौके पर पुलिस, सेना और सीआरपीएफ पर पत्थरबाजी की गई. आतंकी को बचाने के लिए हुड़दंगियों ने पत्थरबाजी का सहारा लेकर सेना के रास्ते में रुकावट डाली. गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, रमजान में युद्धविराम (17 मई से 16 जून) के दौरान पत्थरबाजी के 107 मामले सामने आए. वहीं 15 अप्रैल से 16 मई के बीच पत्थरबाजी की 258 घटनाएं हुई थीं.