नई दिल्ली: दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में शनिवार को एक मुठभेड़ स्थल के समीप एकत्रित हुई उग्र भीड़ को तितर बितर करने के लिए सुरक्षाबलों की कथित गोलीबारी में सात नागरिक मारे गए. पुलिस ने बताया कि मुठभेड़ में तीन आतंकवादी भी मारे गए और सेना का एक जवान शहीद हुआ है. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह घटना सुबह सिर्नू गांव में हुई जब सुरक्षाबलों ने सेना से भागे हुए जहूर अहमद ठोकेर समेत तीन आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया रिपोर्टों के आधार पर इलाके की घेराबंदी कर दी. Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से कहा- कुछ इलाकों में 4जी इंटरनेट सेवा बहाल करने की संभावना तलाशें

उन्होंने बताया कि जैसे ही ठोकेर के मुठभेड़ में फंसे होने के बारे में खबरें फैली तो लोगों ने मुठभेड़ स्थल पर जुटना शुरू कर दिया. ठोकेर इसी गांव का था. अधिकारियों ने बताया कि तीन आतंकवादियों के मारे जाने के साथ ही मुठभेड 25 मिनट में खत्म हो गई लेकिन सुरक्षाबल तब मुश्किल में पड़ गए जब लोगों ने सेना के वाहनों पर चढ़ना शुरू कर दिया. उन्होंने बताया कि लोगों को चेतावनी देने के लिए हवा में गोलियां भी चलाई गईं लेकिन उससे भी उग्र भीड़ रुकी नहीं जिससे सुरक्षाबलों को उन पर गोलियां चलानी पड़ी. Also Read - जम्मू-कश्मीर में नए आतंकियों का जीवन काल अब सिर्फ 1 से 90 दिन: डीजीपी

घटना में सात नागरिकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए जिनमें एक युवक की हालत गंभीर बताई जा रही है. ठोकेर पिछले साल जुलाई में उत्तर कश्मीर के बारामूला जिले के गंटमुल्ला इलाके में सेना की शाखा से लापता हो गया था. वह अपनी सर्विस राइफल और तीन मैगजीन के साथ फरार हो गया था तथा आतंकवादी संगठन में शामिल हो गया था. Also Read - जम्मू-कश्मीर के LG बनाए जाने पर BJP नेताओं ने की मनोज सिन्हा की तारीफ, कही ये बात

सुरक्षाबलों ने कहा कि वह पुलवामा जिले में कई हत्याओं में शामिल था. दो अन्य आतंकवादियों की पहचान की जा रही है. अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ में सेना का एक जवान भी शहीद हो गया जबकि दो अन्य जवानों की हालत गंभीर है. अधिकारियों ने दक्षिण कश्मीर के चारों जिलों में मोबाइल इंटरनेट सुविधाएं बंद कर दी हैं.

इससे पहले भी घाटी में जम्मू कश्मीर पुलिस के जवानों के हथियार लेकर फरार होने और उनके आतंकी संगठनों में शामिल होने के मामले सामने आए हैं. मई 2017 में जम्मू-कश्मीर पुलिस का एक कॉन्स्टेबल चार रायफल लेकर फरार हो गया था. इस घटना के एक दिन बाद आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन ने दावा किया था कि पुलिस कॉन्स्टेबल उनके संगठन के साथ जुड़ गया है.