नई दिल्ली। विवादित इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक ने आज एक बार फिर खुद के बेगुनाह होने की सफाई पेश की. जाकिर ने दावा किया कि उसने कभी भी आतंकवाद को बढ़ावा नहीं दिया है और उसका मकसद हमेशा सांप्रदायिक शांति और एकता को बढ़ावा देना रहा है. जाकिर नाइक भारत में आतंकवाद से संबंधित मामलों में वांछित है और गिरफ्तारी से बचने के लिए मलेशिया में रह रहा है.

मीडिया पर लगाया आरोप

एक बयान में नाइक ने दावा किया कि उसपर आतंकवाद, घृणित भाषण और धन शोधन का आरोप लगाने के लिए मीडिया ने छेड़छाड़ की गई वीडियो क्लिप, संदर्भ से बाहर उद्धधरण और कई अन्य अनुचित तरीके अपनाएं हैं. उसने मलेशिया में रहने की इजाजत देने के लिए वहां के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद की तारीफ भी की. जाकिर नाइक ने कहा, मैं मलेशिया सरकार और प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने बिना भेदभाव इस मुद्दे को समझा और मुझे यहां रहने देने का फैसला किया जिब तक कि मैं यहां के कानून का पालन करता रहूं.

नाइक ने की मलेशिया के पीएम से मुलाकात

नाइक ने हाल में मोहम्मद से मुलाकात की थी जिन्होंने नाइक को प्रत्यार्पित करने के भारत के अनुरोध को खारिज कर दिया है और कहा है कि उन्होंने उनके देश को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है. अपने प्रवक्ता के जरिए जारी बयान में नाइक ने कहा, मैंने इस्लाम के नाम पर या अन्यत्र कभी भी आतंकवाद को बढ़ावा नहीं दिया है. मेरे से इसका संबंध बताने वाला कोई भी बयान इंसानियत के खिलाफ है और काल्पनिक बयान है.

जाकिर नाइक को निर्वासित किए जाने को लेकर मलेशिया से कोई संदेश नहीं

नाइक ने कहा, मेरा मकसद हमेशा से सांप्रदायिक शांति और एकता को बढ़ावा देने वाला रहा है जो मुझपर लगाए गए आरोपों के एकदम उलट है. मैं फिर कहता हूं कि एक मुस्लिम तब तक एक अच्छा मुसलमान नहीं बन सकता है जब तक वह एक अच्छा इंसान नहीं बन जाता है.

जाकिर नाइक 2016 से है फरार

एनआईए ने 2016 में विभिन्न धार्मिक समूहों में बैर को बढ़ावा देने के आरोप में नाइक के खिलाफ आतंकवाद रोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया था. हालांकि इससे पहले ही जाकिर नाइक फरार हो चुका था. आरोप है कि उसके भाषणों से प्रभावित होकर ही बांग्लादेश में कट्टरपंथी युवाओं ने एक रेस्टोरेंट में भयानक हत्याकांड को अंजाम दिया था. भारत सरकार ने उसके संगठन आईआरएफ पर पाबंदी लगाने के साथ ही पीस टीवी पर भी प्रतिबंध लगाया है.