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ज़ी मीडिया ने कोबरापोस्ट और 3 ऑनलाइन न्यूज वेबसाइटों को मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा
ZMCL ने केवल पुष्प शर्मा को ही नहीं बल्कि कोबरापोस्ट के संपादक और संस्थापक अनिरुद्ध बहल को भी कानूनी नोटिस भेजा है.
नई दिल्ली: ज़ी मीडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ZMC) ने ऑनलाइन वेबसाइट कोबरापोस्ट को तथाकथित स्टिंग ‘ऑपरेशन 136’ को लेकर मानहानि का नोटिस भेजा है. इस स्टिंग में दावा किया गया है कि कई संस्थान हिंदुत्व के समर्थन वाली सामग्री को बढ़ावा देने के लिए पैसे लेने के इच्छुक हैं. ‘पत्रकार’ पुष्प शर्मा द्वारा किए गए इस स्टिंग पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए ZMCL ने केवल शर्मा को ही नहीं बल्कि कोबरापोस्ट के संपादक और संस्थापक अनिरुद्ध बहल को भी कानूनी नोटिस भेजा है.
नोटिस में ZMCL ने स्टिंग ऑपरेशन की कड़ी आलोचना करते हुए उसे ‘नियोजित षड़यंत्र और गलत, मनगढ़ंत और आधारहीन करार दिया है जो मिथ्या, डॉक्टर्ड और संपादित किए गए वीडियो पर आधारित है.’ कंपनी का कहना है कि एक स्टिंग ज़ी हिंदुस्तान पर ‘ऑपरेशन राष्ट्रवाद’ प्रसारित किया गया था जिसमें पत्रकार पुष्प शर्मा की गलत मंशा को एक्सपोज किया था और इसमें वो वास्तविक तथ्य दिखाए गए और वह बातचीत दिखाई गई जब पुष्प शर्मा ने आचार्य अटल बनकर जी अधिकारियों से मुलाकात की थी.
कोबरापोस्ट के अलावा, ZMCL ने तथाकथित स्टिंग से संबंधित न्यूज को अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करने पर ‘द वायर’, ‘द क्विंट’ और ‘भड़ास4मीडिया’ को भी कानूनी नोटिस भेजा है. कोबरापोस्ट को भेजे गए नोटिस में, ज़ी ग्रुप ने आलेखों को हटाने और बिना शर्त माफी मांगने के लिए कहा है. साथ ही यह भरोसा देने के लिए कहा है कि इन आलेखों को किसी भी स्वरूप में पुन: प्रचारित नहीं किया जाए. यह भरोसा देने के लिए भी कहा है कि कोई भी मानहानिकारक सामग्री कंपनी के खिलाफ नहीं फैलाई जाए. ऐसा न करने पर, ZMCL फौजदारी और दीवानी दोनों केस दायर करेगा.
‘द वायर’ को यह नोटिस कोबरा स्टिंग को प्रकाशित किए जाने के बाद उसके संबंध में दो आलेख प्रकाशित करने के कारण भेजा गया है. नोटिस में कहा गया है, “आपने (नोटिसी) जानबूझकर जिस तरह से विवादास्पद स्टोरी प्रकाशित की है, वह सवाल खड़े करती है. विवादास्पद आलेखों को प्रकाशित करने से यह पूरी तरह से स्पष्ट हो जाता है कि आपने (नोटिसी) पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के अनुसार कार्य नहीं किया किया है और परोक्ष अभिप्राय के लिए केवल अपने पक्षपातपूर्ण और पूर्वाग्रही मानसिकता को हमारे क्लाइंट के खिलाफ प्रदर्शित किया है.”
नोटिस में कहा गया है, “ऐसा प्रतीत होता है कि हमारे क्लाइंट के खिलाफ पूरी तरह से दुर्भावनापूर्ण, मिथ्या, गलत और मानहानिकारक आरोप लगाकर विवादास्पद आलेखों में मानहानिकारक सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक रूप से आपके द्वारा विशिष्ट जानकारी और हमारे क्लाइंट को बदनाम करने की नीयत से प्रकाशित किया गया है.” “निष्पक्ष मीडिया हाउस के तौर पर, आपसे ऐसे कथित स्टिंग ऑपरेशन, जिसके वास्तविक होने का दावा दागी अतीत वाले उक्त पुष्प शर्मा ने किया था, की वैधता की विवेचना करने की अपेक्षा की गई थी”.
नोटिस में कहा गया है कि ‘द वायर’ ने कोबरापोस्ट द्वारा लगाए गए आरोपों को बिना जांचे-परखे प्रस्तुत कर दिए हैं. ZMCL ने आलेखों को हटाने और बिना शर्त माफी मांगने के लिए कहा है. ऐसा न करने पर, ZMCL फौजदारी और दीवानी दोनों केस दायर करेगा.
‘द क्विंट’ को नोटिस कोबरापोस्ट स्टोरी से जुड़े दो आलेख प्रकाशित करने पर भेजा गया है. नोटिस में कहा गया है, “गलत एवं आधारहीन प्रकथन, सुझाव और आरोप त्रुटिपूर्ण एवं अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग के परिणामस्वरूप हैं और इसमें गलत मंशा जाहिर होती है.” इसमें आगे कहा गया है कि क्विंट की वेबसाइट पर ज़ी के स्टिंग ‘ऑपरेशन राष्ट्रवाद’ का जिक्र नहीं किया गया है जो कि ‘आपकी एजेंडे वाली पत्रकारिता को प्रदर्शित करता है और आपकी गलत मंशा को प्रकटित करता है.’ कानूनी नोटिस इस तथ्य को विशेष तौर पर उल्लेखित करता है कि क्विंट की स्टोरी ने कोबरापोस्ट के दावों की सत्यतता की पुष्टि करने का प्रयास नहीं किया और पत्रकार पुष्प शर्मा के दागी अतीत पर संज्ञान नहीं लिया. क्विंट से स्टोरी हटाने और अगले 48 घंटों में माफी मांगने के लिए कहा गया है. ऐसा न करने पर, ZMCL फौजदारी और दीवानी दोनों केस दायर करेगा.
इसी तरह का नोटिस Bhadas4Media को भेजा गया है. इसमें उसकी वेबसाइट पर पोस्ट किए गए आलेख का विशेष तौर पर उल्लेख किया गया है. नोटिस में कहा गया है कि स्पष्टीकरण दिए जाने के बावजूद, इस वेबसाइट ने षड्यंत्रात्मक मिथ्यावादक विवादास्पद आलेख प्रकाशित किए. इसमें यह भी कहा गया है कि वेबसाइट को ज़ी के स्टिंग के बारे में जानकारी थी, फिर भी वेबसाइट ने एक संदेहयुक्त पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति द्वारा बनाए गए कोबरापोस्ट को वीडियो का गुणगान किया. Bhadas4Media को 48 घंटे का समय इन आलेखों को अप्रकाशित करने तथा माफी मांगने के लिए दिया गया है. ऐसा न करने पर, उसके खिलाफ केस दायर किया जा सकता है.
‘ऑपरेशन 136’, में पुष्प शर्मा आचार्य अटल बनकर मीडिया हाउस पहुंचा और हिंदुत्व के समर्थन वाली सामग्री को चलाने के लिए पैसे की पेशकश की. लेकिन वीडियो को ध्यानपूर्वक देखा जाए तो उसने कई मुख्यधारा वाले मीडिया हाउस की प्रतिष्ठा धूमिल करने के लिए अपनी सहूलियत से वीडियो संपादित किया है.
किसी भी पत्रकारिता संबंधी गतिविधि का मूलाधार साख होता है लेकिन एक ऐसे पत्रकार द्वारा किए गए उक्त कथित स्टिंग के बारे में क्या कहा जा सकता है जिसके पास पत्रकारिता के मूल गुण को दिखाने के लिए कुछ न हो. इतना तो कहा जा सकता है कि मीडिया हाउस को एक्सपोज करने के लिए इस हास्यास्पद ऑपरेशन 136 को करने वाले पुष्प शर्मा का अतीत विवादास्पद है.
उसके खिलाफ दो आपराधिक मुकदमें चल रहे हैं. उनमें से एक 2009 में कथित फर्जी स्टिंग को दिखाने का है और अन्य मामला 2016 में आयुष मंत्रालय के आरटीआई जवाब को गलत ढंग से प्रस्तुत करने का है. इन दोनों के लिए, टाइम्स ऑफ इंडिया और द प्रिंट में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, शर्मा को दो बार दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है. इन दोनों मामले में ट्रायल शुरू होना बाकी है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुष्प शर्मा और उसका साथी पंकज कुमार निर्दोष पुलिसकर्मी को फंसाने के लिए फर्जी सड़क दुर्घटनाओं का इस्तेमाल करते थे. पुलिस अधिकारियों के आने पर, वे समझौता करने का बहाना बनाते, जिसके बाद वे पुलिस अधिकारियों से 500 और 1000 रुपये के खुल्ले पैसे मांगा करते थे. कैमरे में कैद किए जाने से बेखबर पुलिस अधिकारी उन्हें खुल्ले पैसे दे देते थे. बाद में इस फुटेज का इस्तेमाल उस पुलिस अधिकारी को ब्लैकमेल करने के लिए किया जाता था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हालांकि शर्मा और कुमार दोनों का भाग्य जल्द ही रूठ गया जब दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ उसी तरह का जाल बिछाया.
21 अक्टूबर, 2009 को वसंत विहार पुलिस स्टेशन के दो पुलिस अधिकारियों से आईआईटी दिल्ली के नजदीक ‘एक्सीडेंट’ पर रिपोर्ट करने के लिए कहा गया. पुष्प और उसके साथी ने उसी तरह की चाल दो पुलिस अधिकारियों – हेड कॉन्सटेबल ऋषि रोज और सतीश के साथ चली. रोज ने ‘पीड़ित’ कुमार के साथ मामले को निपटाने के लिए 500 रुपये का खुल्ला दिया. इस वीडियो को रिकॉर्ड किया गया और बाद में पुष्प शर्मा ने हेड कॉन्सटेबल ऋषि रोज से पैसे की मांग की. अधिकारी रोज ने बाद में इस मामले की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दी जिन्होंने तत्परता से इस रैकेट का 17 नवंबर 2009 को तब खुलासा कर दिया जब शर्मा को कॉन्सटेबल रोज से 10000 रुपये लेते पकड़ा गया.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह केस दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में लंबित है. बात 2016 की करें, तो पुष्प शर्मा एक बार फिर विवादों में तब आया जब उसने आरोप लगाया कि आयुष मंत्रालय योगा प्रशिक्षकों की भर्ती के दौरान उनके खिलाफ भेदभाव करता है. उसने अपनी रिपोर्ट में एक आरटीआई का जिक्र किया जो कि मंत्रालय के अनुसार फर्जी थी. आयुष मंत्रालय ने ‘फर्जी’ आरटीआई दाखिल करने पर पुष्प शर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और कई धाराओं में उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया.
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