नई दिल्‍ली: विश्‍वव्‍यापी कोरोना वायरस का संक्रमण देश के विभिन्‍न राज्‍यों में अपने पैर फैलाते हुए दिख रहा है. इस बीच झारखंड में कोविड-19 से संक्रमित मरीजों की संख्‍या 132 हो गई है. वहीं, लॉकडाउन के कारण विभिन्न राज्यों में फंसे झारखंड के करीब तीन लाख लोगों ने घर वापसी के लिए पंजीकरण कराया है. Also Read - स्वास्थ्य विभाग में तैनात IAS अधिकारी कोरोना संक्रमित, दिल्ली सरकार में थे स्पेशल ड्यूटी पर

गुरुवार को राज्य स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने कहा झारखंड में COVID19 के 5 और मामले सामने आए हैं, आज सभी पलामू जिले से सामने आए हैं. वे छत्तीसगढ़ से लौटे थे, राज्य में कुल सकारात्मक मामले अब 132 पर हैं. Also Read - Video: अमित शाह की वर्चुअल रैली के विरोध में राबड़ी देवी ने तेजस्‍वी- तेज प्रताप संग बजाई थाली

झारखंड के करीब तीन लाख लोगों ने घर वापसी के लिए पंजीकरण कराया
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बृहस्पतिवार को कहा कि लॉकडाउन के कारण विभिन्न राज्यों में फंसे झारखंड के करीब तीन लाख लोगों ने घर वापसी के लिए पंजीकरण कराया है और उन्हें बिना किसी आनाकानी के वापस लाया जाएगा. उन्होंने बताया कि इनमें से ज्यादातर लोग मजदूर हैं.

सीएम ने केंद्र की आलोचना
रेलवे के सूत्रों ने बताया कि झारखंड इकलौता राज्य है जिसने ‘श्रमिक विशेष’ ट्रेनों के जरिए दूसरे राज्यों से अपने लोगों को बुलाने के लिए अग्रिम भुगतान कर दिया है. सोरेन ने रेल यात्रा का 15 प्रतिशत किराया राज्य से वसूलने के लिए केंद्र की आलोचना करते हुए कहा कि रेलवे के लिए अत्यधिक राजस्व का स्रोत होने के बावजूद झारखंड को कोई राहत नहीं दी गई.

20,000 प्रवासी मजदूर और छात्र पहले ही राज्य में लौट चुके हैं
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए लॉकडाउन के कारण दूसरे राज्यों में फंसे करीब 20,000 प्रवासी मजदूर और छात्र पहले ही राज्य में लौट चुके हैं. झारखंड सरकार ने फंसे हुए प्रवासियों की वापसी के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी है.

ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू की है
सोरेन ने कहा, करीब चार-पांच दिन पहले जब से हमने ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू की है, तब से करीब तीन लाख लोगों ने घर वापसी के लिए पंजीकरण कराया है. हालांकि उन्होंने कहा कि जिसने भी पंजीकरण कराया है जरूरी नहीं कि कुछ आर्थिक गतिविधियों के फिर से शुरू होने के कारण वे सब लौटें.

वापस लाने में कोई आनाकानी नहीं
झारखंड के मुख्यमंत्री ने कहा, जो भी आना चाहते हैं, हमारी सरकार उन्हें वापस लाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. हम खुले दिल से उनका स्वागत करेंगे और उन्हें घर लेकर जाएंगे इसमें कोई आनाकानी नहीं है.

सबसे बड़ी चुनौती सभी एहतियात बरतना
सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार की सबसे बड़ी चुनौती सभी एहतियात बरतते हुए छोटी-सी अवधि में इतनी बड़ी संख्या में लोगों को वापस लाना है. उन्होंने कहा, हम एक स्टेशन पर केवल एक ट्रेन को अनुमति दे सकते हैं और लोगों को वहां से बसों से दूसरे इलाकों तक जाना पड़ेगा. हमने स्टेशन निर्धारित किए हैं जहां ट्रेन आ रही हैं. हमारे पास सूची है कि लोगों को कहां जाना हैं.’’

केंद्र ने दूसरा पैकेज देने में देरी की है
सोरेन ने कहा कि झारखंड संसाधनों और आर्थिक मदद के लिए ज्यादातर केंद्र पर निर्भर है और उसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित किए गए शुरुआती पैकेज से लगभग 250 करोड़ रुपए मिलने के बाद कोई वित्तीय मदद नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि केंद्र ने राज्यों को दूसरा वित्तीय पैकेज देने में देरी की है जिससे कई काम अटक गए हैं और उन्होंने इस संदर्भ में कहा, बारात जाने के बाद खिचड़ी पकने से क्या फायदा.

रेलवे ने कोई मदद नहीं की
प्रवासी मजदूरों को लाने के लिए रेलवे द्वारा राज्यों से 15 फीसदी किराया वसूलने पर सोरेन ने कहा, उन्हें कौन समझाएगा कि वे विदेश से लोगों को विमानों में वापस ला रहे हैं और देश में मजदूरों को ले जाने के लिए किराया वसूल रहे हैं जिनके पास खाने के भी पैसे नहीं हैं. उन्होंने कहा, मैंने रेल मंत्री पीयूष गोयल से अनुरोध किया था कि रेलवे झारखंड से अधिकतम राजस्व कमाता है तो कम से कम उसे कुछ राहत दी जाए, लेकिन कोई मदद नहीं की गई.

अगर 1,000 या 2,000 संक्रमित बढ़ जाते हैं तो राज्य इसे संभाल लेगा
सोरेन ने कहा कि उन्हें बड़ी संख्या में लोगों के लौटने और उसके कारण कोरोना वायरस के मामले बढ़ने का डर नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर 1,000 या 2,000 लोग कोविड-19 से संक्रमित पाए जाते हैं तो इससे रास्ता स्पष्ट हो जाएगा और राज्य इसे संभाल लेगा. उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने मनरेगा के लिए तीन योजनाएं शुरू की ताकि कामगारों को वेतन मिल सकें.