Jharkhand News: झारखंड में पिछड़ा वर्ग समुदाय से आने वाले लोगों को राज्य सरकार की नौकरियों में 36% आरक्षण देने के लिए पिछले वर्गों के लिए राज्य आयोग ने इसकी अनुशंसा मुख्यमंत्री से की है. इसकी आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए इसे मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया है. आयोग ने राज्य सरकार को पिछड़े वर्गों के लिए सरकारी नौकरियों में अधिकतम 50 फीसदी सीट तक आरक्षित रखने की छूट दी है. Also Read - लड़की की जिद ही थी कुछ ऐसी...सिर्फ उसके लिए रेलवे को चलानी पड़ी राजधानी एक्सप्रेस

बता दें कि झारखंड में पिछड़ा वर्ग से आने वाले लोगों को सरकारी नौकरियों में अभी 14 फीसदी आरक्षण मिलता है. पिछड़े वर्गों के लिए राज्य आयोग जल्दी ही इसके बारे में विस्तृत प्रतिवेदन राज्य सरकार को भेजेगा. आयोग की ओर से विभिन्न राज्यों में पिछड़े वर्गों के आरक्षण के लिए किए गए प्रावधानों की प्रति भी राज्य सरकार को भेजी जाएगी. Also Read - मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचा कोरोना वायरस, हेमंत सोरेन की पत्नी का ड्राइवर और सचिव कोरोना संक्रमित

इसके अलावा आरक्षण सीमा को कुल 50% से अधिक बढ़ाने के राज्य सरकार के अधिकार के बारे में भी मुख्यमंत्री कार्यालय को अवगत कराया जाएगा. आयोग ने यह फैसला सदान मोर्चा के आवेदन पर सुनवाई के बाद किया है. मोर्चा की ओर से झारखंड में पिछड़े वर्गों की आबादी 56 फीसदी होने का दावा किया गया था. अब इसी अनुपात में सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग की गई थी. Also Read - दर्दनाक: कोरोना ने एक ही परिवार के 6 सदस्यों की ली जान, मां सहित 5 बेटों की मौत

पिछड़े वर्गों के लिए राज्य आयोग का मानना है कि प्रदेश में अति पिछड़ा वर्ग यानी एनेक्सचर-1 की आबादी पिछड़ा वर्ग यानी एनेक्सचर-2 से अधिक है. इसलिए अति पिछड़ा वर्ग यानी एनेक्सचर-1 को 24 फीसदी और पिछड़ा वर्ग यानी एनेक्सचर-2 को 12 फीसदी आरक्षण झारखंड सरकार कम से कम दे. आयोग ने अपनी अनुशंसा में तमिलनाडु में आरक्षण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला दिया है. तमिलनाडु के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण बढ़ाने का फैसला दिया है.

पिछड़े वर्गों के लिए राज्य आयोग की अनुशंसा को अगर झारखंड सरकार मानती है तो झारखंड की सरकारी नौकरियों में कुल आरक्षण 82 फीसदी हो जाएगा. अभी तक झारखंड में अनुसूचित जाति को 10 फीसदी, अनुसूचित जनजाति को 26 फीसदी, अत्यंत पिछड़ा वर्ग को आठ फीसदी,पिछड़ा वर्ग को छह फीसदी और आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को 10 फीसदी आरक्षण है. ये कुल मिलाकर 60 फीसदी हो गए. पिछड़े वर्ग के लिए 14 फीसदी की जगह 36 फीसदी आरक्षण का प्रावधान करने से सरकारी नौकरियों में कुल आरक्षण 82 फीसदी हो जाएगा.