रांची. झारखंड ने 15 साल बाद दो महिला सांसदों को चुना है. दोनों ही महिलाओं ने झारखंड की राजनीति के दिग्गजों को पछाड़ा है. प्रदेश की इन दोनों ही महिला उम्मीदवारों के बारे में चुनाव (Lok Sabha Election) प्रचार के दौरान दावा किया जा रहा था कि इनके लिए चुनाव जीतना मुश्किल होगा. लेकिन गुरुवार को जब लोकसभा चुनाव की मतगणना (Lok Sabha Election Result 2019 chunav) के परिणाम आए, तो इन दोनों की जीत ने झारखंड से आधी आबादी के प्रतिनिधित्व की हसरत पूरी कर दी. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर चुनाव लड़ रहीं राजद की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी ने जहां झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और जेवीएम-पी के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को हराया. वहीं राज्य के पूर्व सीएम मधु कोड़ा की पत्नी और कांग्रेस उम्मीदवार गीता कोड़ा ने भाजपा के राज्य प्रमुख लक्ष्मण गिलुवा को शिकस्त दे दी. आपको बता दें कि झारखंड ने आखिरी बार वर्ष 2004 में खूंटी से किसी महिला सांसद को चुना था. 2004 में कांग्रेस की सुशीला केरकेट्टा चुनी गई थीं. Also Read - लोकसभा में AAP की करारी हार पर बोले केजरीवाल, वो चुनाव मोदी-राहुल का, मेरा नहीं

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अन्नपूर्णा देवी ने बाबूलाल मरांडी को 4,47,099 मतों के अंतर से हराकर कोडरमा सीट (Election Result) जीता है. कुल 12,08,254 मतों में से अन्नपूर्णा ने 7,51,996 मत प्राप्त किए. मरांडी 2,97,232 वोट पाने में सफल रहे. अन्नपूर्णा इससे पहले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की राज्य अध्यक्ष थीं और लोकसभा (Lok Sabha) चुनाव की घोषणा के बाद भाजपा में शामिल हुई थीं. उधर, कुल 8,76,613 वोटों में से गीता कोड़ा ने 4,30,900 वोट हासिल किए. उनके प्रतिद्वंद्वी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को 3,58,055 वोट मिले. गीता कोड़ा पिछले साल कांग्रेस में शामिल हुई थीं. वर्तमान में वह एक विधायक हैं.

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झारखंड में इन दोनों महिला नेताओं की जीत से एक तरफ जहां इनकी पार्टियों को फायदा हुआ है, वहीं 14 में से सिर्फ 2 सीटों पर आधी आबादी को प्रतिनिधित्व देने को लेकर कुछ सवाल भी होंगे. झारखंड में लोकसभा चुनाव के परिणामों पर नजर डालें तो यहां से कुछ चौंकाने वाले परिणाम भी सामने आए हैं. प्रदेश में हुए लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ा चौंकाने वाला परिणाम संथाल परगना इलाके से आया है, जहां से झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख और राज्य के कद्दावर नेता शिबू सोरेन चुनाव हार गए हैं. वहीं मोदी-लहर के बावजूद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ की हार भी उनकी पार्टी की प्रतिष्ठा को आंच लगाने वाला माना जा रहा है.

(इनपुट – एजेंसी)