रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने हजारीबाग में एक नाबालिग छात्रा को एसिड पिलाने के मामले में पुलिस की धीमी जांच से नाराज होकर शुक्रवार को कहा कि ऐसा लगता है कि इस मामले में पुलिस आरोपियों को बचा रही है. साथ ही न्यायालय ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को मामले में शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. Also Read - राजस्थान: बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय पर विधानसभा अध्यक्ष को हाईकोर्ट का नोटिस

झारखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश डॉ. रविरंजन एवं सुजीत नारायण प्रसाद की पीठ ने शुक्रवार को हजारीबाग में एक नाबालिग छात्रा को एसिड पिलाने के मामले की पुलिस जांच पर गहरी नाराजगी जतायी और राज्य के डीजीपी को शपथपत्र दाखिल कर जांच की अद्यतन स्थिति बताने को कहा है. Also Read - वकील की पत्‍नी जा रही थी दुकान, तीन युवकों ने उड़ेल दिया तेजाब

पीठ ने कहा कि पुलिस इस मामले के आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है लेकिन उसकी पॉलीग्राफी टेस्ट पर मंतव्य मांग रही है. इससे प्रतीत होता है कि पुलिस आरोपी को बचाने का प्रयास कर रही है. अदालत ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को अगले सप्ताह नया शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया. Also Read - मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचा कोरोना वायरस, हेमंत सोरेन की पत्नी का ड्राइवर और सचिव कोरोना संक्रमित

पिछले वर्ष दिसंबर में हजारीबाग की एक नाबालिग स्कूली छात्रा को कुछ लोगों ने एसिड पिला दिया था. छात्रा का पटना एम्स और रांची के रिम्स में इलाज चल रहा था. एसिड पिलाने के कारण वह दो माह तक कुछ बोल नहीं पा रही थी. अखबारों खबर प्रकाशित होने के बाद अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था. इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने इस पर संज्ञान लिया और मामले को जनहित याचिका में बदल दिया था.

19 जून को न्यायालय ने इस मामले में सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. शुक्रवार को पुलिस विभाग की ओर से जो शपथपत्र दाखिल किया गया उसमें कोई ठोस जानकारी नहीं थी. अभियुक्त को फरार बताया गया. शपथपत्र में कहा गया था कि आरोपी की पॉ़लीग्राफी टेस्ट कराने के लिए मंतव्य लिया जाएगा.