रांची. झारखंड के महात्मा गांधी अस्पताल (एमजीएम) में पिछले एक माह में 52 शिशुओं की मौत हो गई. वहीं बच्चों की मौत का कारण कुपोषण बताया जा रहा है. एक जांच रिपोर्ट के अनुसार 16 बच्चों की मौत अंडर वेट के कारण हुई. समान्य नवजात का वजन जन्म के दौरान 2.5 किलो तक ठीक माना जाता है. लेकिन मरने वालों में 9 सौ ग्राम से लेकर 1.5 किलोग्राम के बच्चे थे. Also Read - Audio Case: भाजपा विधायक ललन कुमार पासवान ने लालू प्रसाद के खिलाफ दर्ज कराई प्राथमिकी, IG ने जांच के दिए आदेश

लेकिन सिर्फ के महीने के भीरत हुई इन मौतों से कई सवाल भी प्रसाशन पर उठने लगे हैं. इससे पहले भी एक आंकड़ा आया था. जिसमें 177 दिनों में 164 बच्चों की मौत हुई थी. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 ने साल 2015-16 में एक रिपोर्ट जारी किया था. जिसके अनुसार झारखंड में 5 साल तक के 47.8 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं.

झारखंड में हर साल तकरीबन 8 लाख बच्चें जन्म लेते हैं लेकिन उनमे से 29 हजार बच्चें एक साल के भीतर ही दम तोड़ देते हैं. ऐसे में राज्य में गर्भवती महिलाओं के लिए कई चल रही सरकारी योजना पर सवाल उठने लगा है. गौरतलब हो कि गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से 10 व 11 अगस्त को 30 मासूमों की मौत हो गई थी. सीएम योगी आदित्यनाथ ने 12 अगस्त को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी, जिसकी रिपोर्ट सरकार को 20 अगस्त को सौंपी गई थी.

मुख्य सचिव की रिपोर्ट में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बालरोग विभाग के प्रमुख डॉ. कफील खां, खरीदारी विभाग के प्रमुख डॉ़ सतीश कुमार, प्रधानाचार्य डॉ़ राजीव मिश्र व उनकी पत्नी डॉ पूर्णिमा शुक्ला को भी भ्रष्टाचार के आरोप में नामजद किया गया है. इस घटना के बाद केंद्र सरकार से लेकर योगी सरकार की खूब किरकिरी हुई थी.