रांची: झारखंड विधानसभा चुनाव के चौथे चरण का मतदान खत्म होने के बाद सभी दलों की नजर पांचवें और अंतिम चरण के 16 सीटों पर 20 दिसंबर को होने वाले मतदान पर है. संथाल परगना क्षेत्र की इन सभी सीटों पर जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) को अपने कब्जे वाली सीटों पर कब्जा बरकरार रखने की चुनौती है, वहीं दोनों को बागियों का डर भी सता रहा है. इस चरण के चुनाव में कई सीटों पर अपने ही दलों से बागवत कर चुनावी मैदान में उतरे बागी खेल बिगाड़ रहे हैं. बागियों के चुनाव मैदान में उतर आने से क्षेत्र में जहां चुनावी समीकरण बदल गए हैं, वहीं भीतरघात की आशंका भी इन दलों के रणनीतिकारों को सता रही है. इन सीटों पर नजर डाली जाए तो सबसे अधिक परेशानी भाजपा को उठानी पड़ रही है, क्योंकि सबसे ज्यादा बागी भाजपा से हैं. ये या तो बतौर निर्दलीय चुनावी मैदान में हैं या अन्य दलों से टिकट लेकर चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं.

ऐसा नहीं कि अन्य पार्टियों में बागी नहीं हैं. राजद, कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) गठबंधन भी ‘अपनों’ से संशय की स्थिति में हैं. जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र कुंवर के सामने पार्टी के बागी संजयानंद झा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और सीताराम पाठक निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में आकर कुंवर का खेल बिगाड़ने में लगे हैं. ऐसी ही स्थिति पाकुड़ में बनी हुई है, जहां कांग्रेस के आलमगीर आलम अपनों के चक्रव्यूह में फंस गए हैं. गठबंधन के तहत कांग्रेस के हिस्से में आई इस सीट से उम्मीदवार आलम हैं, जबकि झामुमो के पूर्व विधायक अकील अख्तर ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) से चुनाव मैदान में उतर गए हैं, ऐसे में भीतरघात की आशंका से कांग्रेस डरी हुई है.

शिकारीपाड़ा में भी अंतिम चरण के तहत चुनाव होना है. यहां भाजपा प्रत्याशी परितोष सोरेन के सामने पार्टी से बगावत कर श्याम मरांडी आजसू के टिकट पर चुनाव मैदान में उतर गए हैं, जबकि झामुमो के प्रत्याशी नलिन सोरेन को भी कांग्रेस से बगावत कर बतौर निर्दलीय चुनावी रण में ताल ठोक रहे हाबिल मुर्मू का डर सता रहा है. नाला विधानसभा क्षेत्र में भी बागी भाजपा का खेल बिगाड़ने के लिए चुनावी समर में ताल ठोक रहे हैं. नाला से भाजपा प्रत्याशी सत्यानंद बाटुल चुनाव जीतने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं, लेकिन बगावत कर नेशनल पीपुल्स पार्टी के टिकट पर भाग्य आजमा रहे प्रवीण प्रभाकर और आजसू से माधव चंद्र महतो उनकी रणनीति बिगाड़ रहे हैं. प्रभाकर भाजपा के प्रवक्ता रह चुके हैं.

बोरियो सीट से भी भाजपा के बागी और आजसू के प्रत्याशी ताला मरांडी भाजपा के प्रत्याशी सूर्य नारायण हांसदा के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं. ताला मरांडी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं, ऐसे में इस सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प बना हुआ है. बगावत के कारण जामताड़ा सीट पर भी चुनावी रोमांच चरम पर है. यहां भाजपा के अधिकारिक प्रत्याशी वीरेंद्र मंडल चुनाव मैदान में चुनौती दे रहे हैं, लेकिन भाजपा नेता रहे निर्दलीय प्रत्याशी तरुण गुप्ता और भाजपा के पूर्व विधायक विष्णु भैया की पत्नी चमेली देवी आजसू के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरकर उनके चुनावी गणित को गड़बड़ा रहे हैं.

इस चरण के मतदान में जिन सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें कई सीटों पर मुकाबला दिलचस्प है. ऐसे में कई सीटों पर अपनों से चुनावी समीकरण बदलता दिख रहा है. कई क्षेत्रों में बागी चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की भी स्थिति में नजर आ रहे हैं, इस स्थिति में अगर कुछ सीटों के परिणाम में उलटफेर हो तो आश्चर्यजनक नहीं होगा. झारखंड की 81 विधानसभा सीटों के लिए पांच चरणों में मतदान चल रहा है. पहले चरण में 30 नवंबर को, दूसरे चरण में 7 दिसंबर को, तीसरे चरण में 12 दिसंबर को और चौथे चरण में 16 दिसंबर को मतदान संपन्न हो चुका है. आखिरी और पांचवें चरण का मतदान 20 दिसंबर को होना है. सभी क्षेत्रों के परिणाम 23 दिसंबर को आएंगे.

(इनपुट-आईएएनएस)