Jharkhand Assembly Election Result: झारखंड में हेमंत सोरेन की ऐतिहासिक वापसी: BJP क्यों रही बेअसर?

हेमंत सोरेन ने मजबूत नेतृत्व, महिला सशक्तिकरण योजनाओं, आदिवासी अस्मिता, और स्थानीय मुद्दों पर फोकस कर झारखंड में ऐतिहासिक जीत दर्ज की. बीजेपी नेतृत्व की कमी, बंटे वोट बैंक और जमीनी पकड़ में विफल रही.

Published date india.com Published: November 23, 2024 12:23 PM IST
Jharkhand Assembly Election Result: झारखंड में हेमंत सोरेन की ऐतिहासिक वापसी: BJP क्यों रही बेअसर?

Jharkhand Assembly Election Result 2024: झारखंड की राजनीति में हेमंत सोरेन ने एक नया अध्याय लिखा है. यह पहली बार है जब राज्य में कोई पार्टी मजबूती के साथ सत्ता में वापसी कर रही है. झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व में गठबंधन को भारी बहुमत मिला है. वहीं, बीजेपी की सियासी पकड़ लगातार कमजोर होती नजर आई. आइए समझते हैं कि आखिर किन वजहों से बीजेपी फिसड्डी साबित हुई और हेमंत सोरेन कैसे बना पाए यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड.

मजबूत नेतृत्व बनाम भ्रमित रणनीति

हेमंत सोरेन ने अपनी नेतृत्व क्षमता का प्रभावी प्रदर्शन किया. उन्होंने अपने 5 साल के कार्यकाल को आदिवासी, किसान और महिला हितों के लिए समर्पित दिखाया. इसके विपरीत, बीजेपी के पास न तो कोई लोकल नेता था और न ही कोई ठोस सीएम चेहरा.

  • बाबूलाल मरांडी और चंपई सोरेन जैसे दावेदारों को जनता ने अस्वीकार कर दिया.

हेमंत की लोकप्रियता 41% रही, जो बीजेपी के उम्मीदवारों की तुलना में कहीं अधिक थी.

महिला वोटबैंक: सोरेन का सबसे बड़ा ट्रंप कार्ड

महिलाओं का भरोसा जीतने में हेमंत सोरेन पूरी तरह सफल रहे.

मईयां सम्मान योजना: इस योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये की आर्थिक मदद दी गई.
कल्पना सोरेन का योगदान: हेमंत की पत्नी ने 100 से ज्यादा रैलियों में महिलाओं से सीधे संवाद किया.
महिला वोटिंग में उछाल: इस बार महिलाओं का मतदान 4% बढ़ा, जो हेमंत के पक्ष में गया.

आदिवासी अस्मिता का मुद्दा बना मास्टरस्ट्रोक

झारखंड में आदिवासियों का वोट निर्णायक होता है.

  • हेमंत ने खतियानी और आरक्षण जैसे भावनात्मक मुद्दों को धार दी.
  • केंद्र सरकार और राज्यपाल पर इन मुद्दों को रोकने का आरोप लगाकर उन्होंने बीजेपी को कटघरे में खड़ा किया.
  • जिसका नतीजा यह हुआ कि आदिवासी इलाकों में हेमंत की पार्टी ने बड़ी बढ़त हासिल की.

कुड़मी वोटर्स की नाराजगी ने बिगाड़ा खेल

बीजेपी और उसके सहयोगी दल आजसू का परंपरागत कुड़मी वोट इस बार बिखर गया.

  • जयराम महतो के चुनावी मैदान में उतरने से यह वोट बैंक बंट गया.
  • कुड़मी वोटर्स के छिटकने से कोल्हान और कोयलांचल क्षेत्रों में बीजेपी कमजोर पड़ गई.

बड़े नामों की हार, जमीनी पकड़ का अभाव

बीजेपी के बड़े नेता अपनी सीटें भी नहीं बचा पाए.

  • बोकारो में बिरंची नारायण, देवघर में नारायण दास, और गोड्डा में अमित मंडल पिछड़ गए.
  • जमीनी मुद्दों को समझने और कार्यकर्ताओं को संगठित करने में बीजेपी विफल रही.

झारखंड में बीजेपी का क्यों नहीं चला जादू?

हेमंत सोरेन ने मजबूत नेतृत्व, सामाजिक योजनाओं और भावनात्मक मुद्दों के जरिए जनता का विश्वास जीता. वहीं, बीजेपी स्थानीय नेतृत्व की कमी, विभाजित वोट बैंक और कमजोर जमीनी पकड़ की वजह से हार गई. झारखंड की राजनीति में हेमंत की यह वापसी ऐतिहासिक है, जिसने बीजेपी को आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया है.

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