रांची. झारखंड में बनी दो सरकारों में मंत्री रहे और 3 बार के विधायक, दुलाल भुइयां को रांची की एक विशेष अदालत ने जेल की सजा मुकर्रर की है. रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने गुरुवार को पूर्व मंत्री दुलाल भुइयां को आय से अधिक संपत्ति मामले में 5 वर्ष के कठोर करावास एवं दस लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई. सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अनिल कुमार मिश्रा ने 2013 में दुलाल के खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज किए गए आय से अधिक संपत्ति के मामले में यह सजा सुनाई. सीबीआई ने उच्च न्यायालय के निर्देश पर यह मामला दर्ज किया था. कोर्ट ने उन्हें पीसी एक्ट का दोषी पाया था. अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माने की राशि नहीं भरने की स्थिति में दोषी को जेल में एक वर्ष और बिताना होगा.

भू राजस्व मंत्री रहे हैं दुलाल भुइयां
दुलाल भुइयां, वर्ष 2005 से 2009 के बीच दो सरकारों में मंत्री रहे हैं. वे राज्य के भूमि एवं राजस्व मंत्री के पद पर भी रहे हैं. सीबीआई ने इस मामले में दुलाल के खिलाफ कुल 21 गवाह पेश किए और उसके पास आय के ज्ञात साधनों की तुलना में एक करोड़, तीन लाख रुपए की अधिक संपत्ति पाई गई, जिसकी आय का पूर्व मंत्री कोई स्रोत नहीं बता सके. दुलाल झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर जुगसलाई विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रहे. वह मधु कोड़ा एवं शिबू सोरेन दोनों के ही मंत्रिमंडल में शामिल रहे. दुलाल 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले झामुमो का दामन छोड़कर झारखंड विकास मोर्चा में शामिल हुए. इसके बाद वह भाजपा में शामिल हो गए. बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया. बता दें कि झारखंड हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में पूर्व सीएम मधु कोड़ा, पूर्व मंत्री हरिनारायण राय, एनोश एक्का, भानुप्रताप शाही, कमलेश सिंह और दुलाल भुइयां के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था.

दुलाल ने कहा- ऊपरी अदालत जाएंगे
झारखंड सरकार के पूर्व मंत्रियों के खिलाफ दायर याचिका को लेकर वर्ष 2013 में सीबीआई जांच का आदेश दिया गया था. सीबीआई की विशेष अदालत ने इसी मामले पर सुनवाई करते हुए दुलाल भुइयां के खिलाफ गुरुवार को यह फैसला सुनाया. इधर, विशेष अदालत के फैसले पर पूर्व मंत्री दुलाल भुइयां ने कहा कि वह न्यायपालिका का पूरा सम्मान करते हैं. लेकिन फैसले के खिलाफ अपील करेंगे. दुलाल भुइयां ने कहा, ‘मैं न्यायालय के फैसले का सम्मान करता हूं. सजा के खिलाफ ऊपरी अदालत में जाऊंगा. मुझे पूरा विश्वास है, मेरे साथ इंसाफ होगा.’

इधर, सबूत के अभाव में बरी हुए यशवंत सिन्हा
झारखंड की एक अदालत ने गुरुवार को ही रांची में निषेधाज्ञा का कथित रूप से उल्लंघन करने के 2008 के एक मामले में पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और तीन अन्य को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया. न्यायिक मजिस्ट्रेट वैशाली श्रीवास्तव ने सिन्हा, हजारीबाग से पूर्व भाजपा सांसद यदुनाथ पांडेय, पूर्व राज्यसभा सदस्य अजय मारू और झारखंड खादी बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष संजय सेठ को बरी कर दिया. जिला प्रशासन ने सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा का कथित रूप से उल्लंघन करने और एक प्रतिबंधित क्षेत्र में गैरकानूनी रूप से घुसने के मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे यशवंत सिन्हा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी.

(इनपुट – एजेंसी)