रांची:  झारखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य सरकार से पूछा कि आखिर किसके आदेश पर चारा घोटाले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव को राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के निदेशक के, ‘केली’ बंगले में स्थानांतरित किया गया था और पुनः उन्हें हाल में बंगले से ‘पेइंग वार्ड’ में स्थानांतरित कर दिया गया? Also Read - हजारीबाग मेडिकल कॉलेज की छात्रा का मर्डर, बांध में हाथ-पैर बंधी डेडबॉडी मिली, रेप की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट से होगी

लालू यादव द्वारा रिम्स में इलाज के लिए मिली सुविधाओं के कथित दुरुपयोग से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने राज्य सरकार से यह सवाल किए. उच्च न्यायालय ने यह भी जानना चाहा कि आखिर अस्पताल में लालू के सेवादार की नियुक्ति किस आधार पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है तथा अस्पताल में किसे सेवादार बनाया जा सकता है? Also Read - PM मोदी ने नए साल पर गरीबों को सस्‍ते मकानों का द‍िया ग‍िफ्ट, बोले- ये 6 प्रोजेक्ट वाकई लाइट हाउस की तरह हैं

इससे पहले न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ में लालू से जुड़े मामले में सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद ने राज्य सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने अदालत को बताया कि न्यायिक हिरासत में इलाज कराने वाले कैदियों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाई गई है उसी के तहत उनकी सुरक्षा की व्यवस्था की जाती है और लोगों से उनके मिलने की प्रक्रिया तय की जाती है. Also Read - साल के आखिरी Man Ki Baat ' में PM Modi ने कीं ढेर सारी बातें...युवाओं की 'Can Do-Will Do' को सराहा,

उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से यह भी पूछा कि कैदी से अनावश्यक लोग मिलते हैं तो इसके लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार होगा? उच्च न्यायालय के सवालों पर अपर महाधिवक्ता ने एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिस पर इस मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय ने 18 दिसंबर के लिए निर्धारित की.

मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने उच्च न्यायालय को बताया कि जेल नियमावली का उल्लंघन करने को लेकर लालू प्रसाद के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है. इस पर उच्च न्यायालय ने कहा कि वह एक अलग मामला है. सीबीआई ने कहा कि उच्च न्यायालय ने पिछले तीन माह में लालू से मिलने वाले लोगों की सूची भी राज्य प्रशासन से मांगी थी. इस पर उच्च न्यायालय ने कहा कि यह सूची उन्हें मिल गई है.

उल्लेखनीय है कि 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले से संबंधित चार विभिन्न मामलों में 14 वर्ष तक कैद की सजा पाने के बाद न्यायिक हिरासत में रिम्स में इलाजरत लालू यादव की जमानत याचिका पर उच्च न्यायालय में बहस के दौरान 27 नवंबर को सीबीआई ने यह मामला उठाया था और अदालत को बताया था कि लालू रिम्स में मिली इलाज की सुविधा का दुरुपयोग कर रहे हैं.
तब अदालत ने सीबीआई की यह बात सुनने के बाद निर्देश दिया था कि इस मामले में वह चार दिसंबर को सुनवाई करेगी.

उच्च न्यायालय ने लालू की जमानत पर सुनवाई के दौरान अक्तूबर में जेल प्रशासन से पूछा था कि जेल में रहने के दौरान लालू प्रसाद से कितने लोग मिले हैं, इसकी पूरी रिपोर्ट उच्च न्यायालय में दाखिल की जाए. इसी आदेश के आलोक में उच्च न्यायालय में इसकी रिपोर्ट दाखिल की गई थी.

इसके अलावा, नौ अक्तूबर को सुनवाई के दौरान लालू के लंबे समय से रिम्स में इलाज के लिए भर्ती होने के मामले का संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने रिम्स प्रशासन को लालू यादव के स्वास्थ्य की विस्तृत रिपोर्ट उच्च न्यायालय में पेश करने के निर्देश दिये थे.

खास तौर पर उच्च न्यायालय में इन दोनों मामलों में सुनवाई का महत्व लालू यादव द्वारा भाजपा विधायक ललन पासवान को कथित रूप से अस्पताल से फोन कर बिहार सरकार को गिराने में मांगी गयी मदद की पृष्ठभूमि में और बढ़ गया था. इसी फोनकांड के चलते लालू यादव को 26 नवंबर को रिम्स निदेशक के बंगले से आनन-फानन में वापस रिम्स के वार्ड में भेज दिया गया था.

(इनपुटः एजेंसी)