नई दिल्ली. सरकारी अधिकारियों के बीच होने वाले विवाद यूं तो विभागीय स्तर पर ही निपटा लिए जाते हैं, इनकी खबरें कभी बाहर नहीं आ पातीं. लेकिन झारखंड के मामले में ऐसा नहीं है. यहां दो वरिष्ठ अधिकारियों के बीच का विवाद सोशल मीडिया पर पहुंच गया है, जिसके बाद संबंधित सरकारी एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं. दरअसल, राज्य के हजारीबाग जिले में तैनात डिप्टी कलेक्टर (DC) रविशंकर शुक्ला और राज्य सेवा की एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट दीपमाला के बीच विवाद हो गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार परेशान एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट दीपमाला ने डीसी के खिलाफ 9 पन्ने का एक पत्र लिखा है, जो सोशल मीडिया (वाट्सएप) पर वायरल हो गया है. हालांकि इस चिट्ठी पर न तो दीपमाला का हस्ताक्षर है और न ही यह उनके लेटरहेड से जारी हुआ है. झारखंड से प्रकाशित हिन्दी अखबार दैनिक भास्कर के अनुसार दीपमाला ने भी वरीय अधिकारियों को किसी तरह का पत्र भेजने से इनकार किया है, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा है कि वह एक साल से परेशान हैं, इसलिए जो भी उनके मन में आया उन्होंने लिख दिया. दीपमाला का आरोप है कि डीसी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को सार्वजनिक तौर पर बेइज्जत करते हैं. वे जान-बूझकर महिला अधिकारियों की नाइट-ड्यूटी लगाते हैं.

महिला अधिकारी की चिट्ठी पर मांगी गई रिपोर्ट
हजारीबाग में पदस्थ महिला एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की इस चिट्ठी के वायरल होने के बाद संबंधित विभाग सक्रिय हो गए हैं. दीपमाला के 9 पन्नों के पत्र को लेकर कार्मिक विभाग के अपर मुख्य सचिव ने उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त से पूरे मामले पर रिपोर्ट मांगी है. वहीं, झारखंड प्रशासनिक अधिकारियों के संगठन ‘झासा’ ने भी अपने हजारीबाग यूनिट से इस संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी है. दैनिक भास्कर में छपी खबर के अनुसार, दीपमाला के पत्र में लगे आरोपों पर हजारीबाग के डीसी रविशंकर शुक्ला ने कहा है कि दीपमाला को हमेशा से स्पेशल लीव मिलता रहा है. बीते दिनों भी उन्हें स्पेशल लीव दिया गया है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दीपमाला ने अपने पत्र में इस बात का उल्लेख किया है कि महिलाओं को सरकार की तरफ से मिलने वाले स्पेशल लीव को लेकर भी डीसी आपत्ति करते हैं. अगर किसी महिला को स्पेशल लीव मिल भी जाती है तो छुट्टी से पहले उसकी नाइट-ड्यूटी लगा दी जाती है.

महिला एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट दीपमाला की वायरल चिट्ठी.

महिला एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट दीपमाला की वायरल चिट्ठी.

 

महिला मजिस्ट्रेट ने डीसी पर लगाए ये आरोप
1- पत्र में लिखा गया है कि डीसी अधीनस्थ कर्मचारियों को सार्वजनिक रूप से बेइज्जत करते हैं. वे एक कर्मी को टार्गेट कर सबके सामने इतना जोर से चिल्लाते हुए डाटते हैं कि दूसरे लोगों में भी उनका खौफ हो. दीपमाला ने अपने पत्र में लिखा है कि डीसी का ट्रांसफर होने के बाद वह लड्डू बांटेंगी.

2- दीपमाला ने आरोप लगाया है कि डीसी के टॉर्चर के कारण वह एक साल से फीयर साइकोसिस में जी रही हैं. उन्होंने यह भी लिखा है कि इस पत्र के बाद क्या नतीजा होगा, उसका मुझे अंदाजा है. मेरे काम में अब गलती निकाली जाएगी. उन्हें नौकरी से हटाए जाने का प्रयास भी किया जाएगा. लेकिन एक साल तक मानसिक उत्पीड़न झेलने के बाद अब वह इन सबके लिए तैयार हैं. उन्हें किसी की सहानुभूति नहीं चाहिए.

3- स्पेशल लीव को लेकर दीपमाला ने डीसी पर आरोप लगाया है कि बीते 19 अगस्त को उन्होंने दो दिन का स्पेशल लीव मांगा तो नहीं दिया गया. इसके बदले 20 अगस्त से पांच दिन तक ड्यूटी लगा दी गई. दीपमाला ने लिखा है कि स्पेशल लीव का आग्रह करने पर डीसी ने कहा कि वह लिखकर दे दें कि ऐसे डीसी के साथ काम नहीं कर सकतीं या फिर छुट्टी पर चली जाएं.

4- दीपमाला का आरोप है कि ‘झासा’ के अफसरों को डेरोगेट कर डीसी को सैडिस्टिक प्लेजर का अनुभव होता है. डीसी महिला अधिकारियों की जान-बूझकर रात में वहां पर ड्यूटी लगाते हैं, जहां महिलाएं सुरक्षित नहीं महसूस कर सकतीं. दीपमाला ने लिखा है कि ऐसे में अगर उनका रेप या हत्या हो जाए तो क्या डीसी इसकी जिम्मेवारी लेंगे?

5- सोशल मीडिया पर वायरल हुए पत्र में दीपमाला ने लिखा है कि हजारीबाग जिले के बीडीओ और सीओ से बंधुआ मजदूरों की तरह काम लिया जाता है. दीपमाला ने लिखा है कि आज हजारीबाग का कई क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा स्थान है, लेकिन यह डीसी के कारण नहीं, बल्कि यहां काम करने वाले बीडीओ और सीओ जैसे अफसरों के कारण है. लेकिन डीसी इन बीडीओ और सीओ से बंधुआ मजदूरों की तरह काम कराते हैं. उनके ऊपर प्रपत्र-क का तलवार लटका कर काम लिया जाता है. कई अधिकारियों का तो पिछले 6 महीने से वेतन तक बंद है.