रांची| सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने रविवार को 12 वीं कक्षा का रिजल्ट घोषित कर दिया है. कई लोगों ने इसमें बेहतर प्रदर्शन किया तो कई लोगों के हाथ निराशा भी लगी. जिन लोगों ने अच्छे नंबर पाए हैं जाहिर है उन्होंने इसके पीछे कड़ी मेहनत की है लेकिन आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझते हुए भी 95 प्रतिशत नंबर प्राप्त किए.

रांची के रहने वाले तुषार ऋषि अभी सिर्फ 19 साल के हैं और हड्डियों के कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं बावजूद इसकेउ उनकी पढ़ाई में कोई कमी नहीं आई. दिल्ली पब्लिक स्कूल के छात्र तुषार ने अंग्रेजी में 95, भौतिक विज्ञान में 95, गणित में 93, कंप्यूटर में 89 और फाइन आर्ट्स में 100 में से 100 अंक हासिल किए हैं.

तुषार को इस बात का पता 10 वीं कक्षा में चला कि उनके बांये घुटने में कैंसर है जिस वजह से उन्हें अपनी परीक्षाएं भी छोड़नी पड़ी थी. इसके बाद 11 महीने तक उनकी कीमोथेरेपी भी चली लेकिन उन्होंने पढ़ाई से मन नहीं हटाया और न ही मनोबल टूटने दिया. तुषार ने 2015 में 10 वीं की परीक्षाएं दोबारा दीं और 10 सीजीपीए स्कोर किए थे.

तुषार ने कहा 12 वीं के बाद वे इंजीनियरिंग में अपना करियर नहीं बनाना चाहते बल्कि दिल्ली विश्वविद्यालय के किसी अच्छे कॉलेज से अंग्रेजी या अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन करना चाहते हैं. तुषार के पिता शशि भूषण अग्रवाल, राज्य कृषि विभाग में काम करते हैं वहीं उनकी मां रितु अग्रवाल, बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा में प्रोफेसर हैं. उनकी मां ने बताया कि तुषार ने ये सफलता अपने बल पर ही पायी है. वह पूरी तरह से स्कूल की कक्षाओं पर निर्भर था. उसने किसी तरह की ट्यूशन नहीं ली.

tushar
तुषार के बारे में एक बात ये भी जान लेने वाली है कि वे एकेडमिक्स में तो अच्छे हैं ही उन्होंने साहित्य की दुनिया में भी नाम बनाया है. तुषार ने The patient patient शीर्षक से एक किताब भी लिखी है जिसमें उन्होंने अपनी कैंसर के संघर्ष की कहानी बयां की है. उनकी ये किताब अमेजन पर उपलब्ध है और अच्छी डिमांड में हैं