नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने दंगे के एक मामले में आरोपी झारखंड के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और उनकी विधायक पत्नी निर्मला देवी से मंगलवार को यह बताने को कहा कि कितनी बार राज्य में होने के बावजूद वे निचली अदालत की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए. शीर्ष अदालत ने इन दोनों से पूछा कि वे मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से बाहर क्यों गए और अदालत के रोक के आदेश के बावजूद उनकी पत्नी झारखंड विधानसभा की बैठक में शामिल क्यों हुईं. झारखंड के सरकारी वकील द्वारा शर्तों का कथित रूप से उल्लंघन करने पर उनकी जमानत रद्द करने के अनुरोध के बाद अदालत ने ये सवाल दागे.

न्यायमूर्ति एस.ए. बोबडे और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, ‘‘अगर आप झारखंड में होते हुए निचली अदालत की कार्यवाहियों में शामिल नहीं हुए तो आपने जमानत शर्त का उल्लंघन किया होता.’’ पीठ ने कहा कि साव और देवी को जमानत देते वक्त एकमात्र अपवाद यह था कि वे उनके खिलाफ निचली अदालत की कार्यवाही में शामिल होने के लिए झारखंड जाएंगे. पीठ ने उनसे एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दायर करके भोपाल से बाहर जाने के हर मौके की जानकारी देने को कहा.

शीर्ष अदालत ने इस मामले में साव और देवी को 15 दिसंबर 2017 को जमानत दी थी और उन्हें जमानत शर्त के तौर पर मध्य प्रदेश के भोपाल में ही रहने का निर्देश दिया था. उन्हें भोपाल के पुलिस अधीक्षक को जानकारी देकर केवल अदालत में सुनवाई के लिए झारखंड जाने की अनुमति दी गई थी. साव और देवी 2016 में पुलिस और गांववालों के बीच हिंसक झड़पों से संबंधित मामले में आरोपी हैं. इन झड़पों में चार लोगों की मौत हुई थी. साव अगस्त 2013 में हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री रहे हैं.