रामगढ़ (झारखंड):  देश की राजधानी दिल्ली में भूख से तीन बच्चियों की मौत के बाद अब झारखंड में भूख से एक मौत का दावा किया जा रहा है.  झारखंड के रामगढ़ जिले में 40 साल के आदिवासी व्यक्ति की पत्नी ने बताया कि भूख के चलते उसके पति की मौत हो गई. महिला के मुताबिक, उसके पास राशन कार्ड नहीं था. आदिम बिरहोर आदिवासी से ताल्लुक रखने वाले राजेंद्र बिरहोर की  गुरुवार को माडू खंड के नवाडीह गांव में मौत हो गई. नवाडीह गांव यहां से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. बहरहाल, जिला अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया है और कहा कि बिरहोर की मौत बीमारी के चलते हुई.

दिल्ली में भूख से मौत: तीनों बहनों के पेट खाली थे, एक हफ्ते से कुछ नहीं खाया था

बता दें बीते दिनों देश की राजधानी दिल्ली में तीन बच्चियों के भूख से मरने का मामला सामने आया था. इस घटना के बाद सियासी और प्रशासनिक हल्कों में हड़कंप मचा हुआ है.

बिरहोर की पत्नी शांति देवी (35) ने बताया कि उसके पति को पीलिया था और उसके परिवार के पास इतना पैसा नहीं था कि वे उसके लिए डॉक्टर द्वारा बताया गया खाद्य पदार्थ और दवाई खरीद सकें. शांति ने बताया कि उसके परिवार के पास राशन कार्ड नहीं था, जिससे वे राज्य सरकार की सार्वजनिक वितरण योजना के तहत सब्सिडी वाले अनाज प्राप्त कर पाते.

दिल्ली में भूख से मौतः लाशें देखते ही रोयी थी मां, लेकिन आंसू निकलने से पहले ही बंद करा दिया मुंह….आखिर क्यों

6 बच्चों का पिता बिरहोर परिवार में एकमात्र कमाने वाले सदस्य था. उसे हाल में यहां के राजेन्द्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेंज में भर्ती कराया गया था, लेकिन इलाज के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी. मांडू के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) मनोज कुमार गुप्ता ने आदिवासी व्यक्ति की भूख से मौत की बात से इनकार किया है.

बीडीओ ने गुरुवार को बिरहोर के घर का दौरा किया और दावा किया कि बिरहोर की मौत बीमारी के चलते हुई. बीडीओ ने स्वीकार किया कि परिवार के पास राशन कार्ड नहीं था. उन्होंने शांति देवी को अनाज और परिवार के लिए 10,000 रुपए दिए. उन्होंने कहा, ”हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि उनके परिवार का नाम सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी युक्त राशन पाने वालों की सूची में क्यों नहीं दर्ज था.”  ( एजेंसी )