नई दिल्ली:  कई बार बिजी लाइफस्टाइल और लेट फैमिली प्लानिंग के चलते महिलाओं को कंसीव करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. महिलाएं लाख कोशिशें करती हैं यहां तक की अस्पतालों के भी कई चक्कर लगाती हैं लेकिन फिर भी वह कंसीव नहीं कर पाती. डॉक्टर्स भी महिलाओं को सही डाइट लेने और एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं. ऐसे में आपको जानकर हैरानी होगी कि महिलाओं में प्रजनन शक्ति को बढ़ाने के लिए योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. आज हम आपको कुछ ऐसे योगासनों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनसे महिलाओं की प्रजनन शक्ति बढ़ सकती है. आइए जानते हैं. Also Read - Pregnancy Tips: मानसून के दौरान इन बातों का खास ख्याल रखें गर्भवती महिलाएं, नहीं होगी कोई परेशानी

1. हस्तपादासन- योग की कई क्रियाओं में से एक है हस्तपादन आसन. इस योग आसन से आपको कई फायदे मिलते हैं. त्वचा के दाग धब्बों के अलावा यह आंखों के नीचे पड़ने वाले काले घेरे को भी खत्म करता है. Also Read - Solar Eclipse 2020 Myths: जानें कितने सही हैं ग्रहण के दौरान गर्भावस्था से जुड़े ये मिथक

हस्तपादासन करने का तरीका-
– दोनों पैरो को आपस मे मिला ले.
– दूसरे नंबर पर हाथों को सिर के पास ले जाए तथा उसके बाद आराम-आराम से नीचे की ओर झुकना है.
– पूरे शरीर का वजन दोनों पैरो पर होना चाहिए.
– सांस को छोड़ते रहे तथा घुटनों के पास सिर को लगाए.
– दोनों हाथ फर्श पर स्पर्श होने चाहिए. Also Read - International Yoga Day 2020: रोजाना करें ये योगासन दिल समेत पूरा शरीर बना रहेगा स्वस्थ

हस्तपादासन करने का लाभ-

– यह आसन रीढ़ की हड्डी को शक्तिशाली बनाता है.
– इस आसन के अभ्यास से आंतें स्वस्थ रहती हैं.
– यह मोटापे को कम करता है.
– जननांगों को स्वस्थ बनाता है.
– इस आसन से शरीर लचीला होता है.
– कमर दर्द में राहत मिलती है.

2. भुजंगासन- इस आसन में शरीर की आकृति फन उठाए हुए भुजंग अर्थात सर्प जैसी बनती है इसीलिए इसको भुजंगासन या सर्पासन कहा जाता है.

भुजंगासन करने का सही तरीका
भुजंगासन करने के लिए पेट के बल लेट जाएं. अब अपने दोनों हाथों को माथे के नीचे टिकाएं. दोनों पैरों के पंजों को साथ रखें. फिर अपने माथे को ऊपर ऊठाएं और दोनों बाजुओं को कंधों के समान लाएं. ऐसा करने पर शरीर का सारा भार बाजुओं पर पड़ेगा. अब शरीर के अगले भाग को बाजुओं के सहारे ऊपर उठाएं. शरीर को स्ट्रेच करके लंबी सांस लें. कुछ समय तक इस आसन को करें.

भुजंगासन के फायदे
इस आसन से रीढ़ की हड्डी सशक्त होती है. और पीठ में लचीलापन आता है. यह आसन फेफड़ों की शुद्धि के लिए भी बहुत अच्छा है और जिन लोगों का गला खराब रहने की, दमे की, पुरानी खाँसी अथवा फेंफड़ों संबंधी अन्य कोई बीमारी हो, उनको यह आसन करना चाहिए. इस आसन से पित्ताशय की क्रियाशीलता बढ़ती है और पाचन-प्रणाली की कोमल पेशियाँ मजबूत बनती है. इससे पेट की चर्बी घटाने में भी मदद मिलती है और आयु बढ़ने के कारण से पेट के नीचे के हिस्से की पेशियों को ढीला होने से रोकने में सहायता मिलती है. इससे बाजुओं में शक्ति मिलती है. पीठ में स्थित इड़ा और पिंगला नाडि़यों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है. विशेषकर, मस्तिष्क से निकलने वाले ज्ञानतंतु बलवान बनते है. पीठ की हड्डियों में रहने वाली तमाम खराबियाँ दूर होती है. कब्ज दूर होता है. तथा बवाशीर मे भी लाभ देता है.

3. पश्चिमोत्तनासन- पश्चिम अर्थात पीछे का भाग- पीठ. पीठ में खिंचाव उत्पन्न होता है, इसीलिए इसे पश्चिमोत्तनासन कहते हैं. इस आसन से शरीर की सभी माँसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है.

पश्चिमोत्तानासन करने का तरीका

– सबसे पहले जमीन पर चटाई या दरी बिछाकर बैठ जाएं.
– अब आप दोनों पैरों को सामने फैलाएं.
– पीठ की पेशियों को ढीला छोड़ दें.
– सांस लेते हुए अपने हाथों को ऊपर लेकर जाएं.
– फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें.
– इसके बाद अपने हाथ से उंगलियों को पकड़ने और नाक को घुटने से सटाने की कोशिश करें.
– धीरे-धीरे सांस लें, फिर धीरे-धीरे सांस छोड़े.
– इसके बाद अपनी स्थिति में वापस आ जाएं.

पश्चिमोत्तानासन आसन के फायदे

इस आसन के अभ्यास से मन्दाग्नि, मलावरोध, अजीर्ण, उदररोग, कृमिविकार, सर्दी, खाँसी, वातविकार, कमर का दर्द, हिचकी, कोढ, मूत्ररोग, मधुप्रमेह, पैर के रोग, स्वप्नदोष, वीर्यविकार, रक्तविकार, एपेन्डीसाइटिस, अण्डवृद्धि, पाण्डुरोग, अनिद्रा, दमा, खट्टी डकारें आना, ज्ञानतन्तु की दुर्बलता, बवासीर, नल की सूजन, गर्भाशय के रोग, अनियमित तथा कष्टदायक मासिक, ब्नध्यत्व, प्रदर, नपुंसकता, रक्तपित्त, सिरोवेदना, बौनापन आदि अनेक रोग दूर होते हैं .