नई दिल्ली: 14 अप्रैल को सूर्य मीन से निकलकर मेष राशि में प्रवेश किया है. इसके साथ शुभ कार्यों की शुरुआत हो गई है. बैशाख महीने में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया मनाते हैं. यह दिन इतना शुभ होता है कि बिना किसी मुहूर्त के भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं. मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म हुआ था. इसी दिन सतयुग का आरंभ हुआ था. इस बार अक्षय तृतीया 18 अप्रैल को मनाई जाएगी. Also Read - Akshay Tritiya 2019: मां लक्ष्‍मी के इन शक्तिशाली मंत्रों का करें जाप, मिलेगा अपार धन...

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इस वर्ष लगभग 500 सालों बाद सौभाग्य योग तथा छत्र योग का संयोग बन रहा है. अक्षय तृतीया पर स्नान, दान और मांगलिक कार्यों का अधिक फलदायी माना जा रहा है. Also Read - चारधाम यात्रा 2019: अक्षय तृतीया पर शुरू होगी चारधाम यात्रा, जानें हर डिटेल...

शुभ मुहूर्त

पूजा के लिए:

इस बार अक्षय तृतीया तिथि 24 घंटे की है. इसलिए सुबह 05:56 से आधी रात तक आप भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं.

खरीदारी के लिए:

वैसे तो अक्षय तृतीया खुद में इतना शुभ होता है कि आप पूरे दिन खरीदारी कर सकते हैं. लेकिन इसमें भी सुबह 05:56 से दोपहर 12:20 तक खरीददारी करने का सबसे शुभ मुहूर्त है.

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पूजन विधि

अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के साथ-साथ धन के देवता कुबेर की भी पूजा की जाती है.

एक लकड़ी का तख्त लें और उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछा दें.

इस पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के साथ-साथ धन कुबेर की मूर्ति या तस्वीर भी रखें.

मां लक्ष्मी की मूर्ति भगवान विष्णु के बाई ओर ही रखें और कुबेर को दाईं तरफ. आपने तस्वीरों में भी ऐसा ही देखा होगा.

मिट्टी, पीतल या तांबे के दीया में दीप जलाएं. दीप जलाने के लिए शुद्ध घी का इस्तेमाल करें.

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भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और धन कुबेर देवता के सामने हाथ जोड़कर बैठें और उन्हें प्रार्थना स्वीकार करने के लिए मन ही मन आमंत्रित करें. उन्हें अपने घर बुलाएं और आर्शीवाद देने को कहें.

हल्दी, कुमकुम और चंदन  और अक्षत का टीका लगाएं.

तीनों देवी-देवताओं को केला, नारियल, पान सुपारी, मिठाई और जल चढ़ाएं.

कुछ देर भगवान के सामने हाथ जोड़कर उनकी प्रार्थना करें और उनका आर्शीवाद मांगे.

आरती गाएं और साथ में घंटी जरूर बजाएं. क्योंकि घंटियों की ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा घर से बाहर चली जाती है.

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अगर व्रत रखना है तो कैसे करें पूजा

अक्षय तृतीया पर आप चाहें तो व्रत भी कर सकते हैं यह बहुत शुभकारी और फलदायी होता है. अक्षय तृतीया के दिन पूजा करने के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें. घर की सफाई व नित्य कर्म से निवृत्त होकर पवित्र या शुद्ध जल से स्नान करें. इसके बाद घर के मंदिर में या किसी भी साफ सुथरी जगह पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. इसके बाद यह मंत्र पढ़ें…

ममाखिलपापक्षयपूर्वक सकल शुभ फल प्राप्तये

भगवत्प्रीतिकामनया देवत्रयपूजनमहं करिष्ये।

भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं. भगवान विष्णु को माला चढ़ाएं. नैवेद्य में जौ या गेहूं का सत्तू, ककड़ी और चने की दाल अर्पण करें. अगर हो सके तो विष्णु सहस्रनाम का जप करें. तुलसी मा को भी जल चढ़ाएं और आरती गाएं.