अल्जाइमर रोग से 65 वर्ष से अधिक उम्र के पांच से छह प्रतिशत लोग प्रभावित होते हैं. यह एक न्यूरोजेनरेटिव बीमारी है और डिमेंशिया का प्रमुख कारण भी है. भारत में डिमेंशिया से पीड़ित लोगों की तीसरी सबसे बड़ी आबादी मौजूद है जो इसे एक स्वास्थ्य संकट बनाती है, जिसे जल्द से जल्द ठीक किए जाने की जरूरत है.

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हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के. के. अग्रवाल ने कहा, “शुरुआती ईडी असामान्य है और कुछ मामलों में पारिवारिक भी, लेकिन सभी मामलों में ऐसा नहीं होता. एक प्रतिशत से भी कम मामलों में (दुनिया भर में कई सौ परिवार) ऐसे हैं और अक्सर विरासत के तौर पर ऑटोसोमल पैटर्न देखने को मिलता है. मोमोरी लॉस एडी का प्रमुख लक्षण है और आमतौर पर इसकी पहली अभिव्यक्ति भी.”

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डॉ अग्रवाल ने बताया, “व्यवहार संबंधी गड़बड़ी से डिमेंशिया के साथ-साथ मरीज के परिवारों और देखभाल करने वालों को भी प्रभावित कर सकती है. संज्ञानात्मक पुनर्वास, स्मृति और उच्च संज्ञानात्मक कार्य को बनाए रखने के लिए डिमेंशिया के शुरुआती चरणों में रोगियों की सहायता की जा सकता है. इस स्थिति का जल्द से जल्द निदान करना और ऐसे मरीजों के लिए उचित देखभाल योजना निर्धारित करना जरूरी है.”

इस बीमारी को शुरूआत में रोकने के लिए कुछ सुझाव :

* डाइट का रखें ध्यान: सब्जियां और फल, साबुत अनाज, मछली, लीन पोल्ट्री आदि, और प्रोटीन स्रोतों के रूप में सेम और अन्य फलियां अपने भोजन में शामिल करें.

* हर दिन लगभग 30 मिनट नियमित रूप से कसरत करें, क्योंकि यह ह्लड सर्कुलेशन में सुधार करने में मदद करता है.

* कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स, ब्लड प्रेशर, और ब्लड शुगर जैसे महत्वपूर्ण आंकड़ों पर नजर रखें.

* पहेली, क्रॉसवर्ड, मेमोरी और संबंधित गेम जैसे मस्तिष्क वाले गेम्स का प्रयोग करें.