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जब भूख लगे जो मिले खा लो! ये नजरिया जानलेवा है, जानें कैसे...
भागती-दौड़ती जिंदगी में अक्सर लोग अपने खानपान का ध्यान नहीं देते. कई बार तो ऐसा होता है कि जो भी मिलता है उसे खा लेते हैं.
भागती-दौड़ती जिंदगी में अक्सर लोग अपने खानपान का ध्यान नहीं देते. कई बार तो ऐसा होता है कि जो भी मिलता है उसे खा लेते हैं. ना खाने का कोई समय फिक्स होता है और ना ही खाने की क्वालिटी का ध्यान देते हैं.
तो ऐसे में क्या होता है? आपके शरीर पर इतना खराब असर होता है जिसका शायद आपको अंदाजा भी ना हो.
असर के बारे में जानने से पहले ये जान लें कि ग्लोबल बर्डन ऑफ डिसीज स्टडी के वर्ष 2017 के आंकड़े के मुताबिक, विश्व में 20 प्रतिशत मौतें खराब आहार के कारण होती हैं.
ऐसा देखा गया है कि तनावपूर्ण वातावरण लोगों को चटपटे, मसालेदार जंक फूड वगैरह खाने के लिए प्रेरित करते हैं. इस आदत ने पौष्टिक भोजन की परिभाषा को बिगाड़ दिया है. यह समझना महत्वपूर्ण है कि स्वस्थ आहार का मतलब व्यक्ति के वर्तमान वजन के 30 गुना के बराबर कैलोरी का उपभोग करना ही नहीं है. स्थूल और सूक्ष्म पोषक तत्वों का सही संतुलन भी उतना ही आवश्यक है.
हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल का कहना है, ‘हमारे प्राचीन अनुष्ठानों और परंपराओं ने हमें आहार की समस्याओं के बारे में बताया है. वे विविधता और सीमा के सिद्धांतों की वकालत करते हैं, यानी मॉडरेशन में कई तरह के भोजन खाने चाहिए. वे भोजन में सात रंगों (लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, बैंगनी, सफेद) तथा छह स्वादों (मीठा, खट्टा, नमकीन, कड़वा, चटपटा और कसैला) को शामिल करने की सलाह देते हैं. हमारी पौराणिक कथाओं में भोजन चक्र के कई उदाहरण हैं, जैसे कि उपवास हमारे लिए एक परंपरा है. हालांकि, इसका मतलब कुछ भी नहीं खाना नहीं है, बल्कि कुछ चीजों को छोड़ने की अपेक्षा की जाती है’.
उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति ने कुछ खाया है, मस्तिष्क को यह संकेत केवल 20 मिनट बाद मिलता है. इसके लिए प्रत्येक ग्रास को कम से कम 15 बार चबाना महत्वपूर्ण है. यह न केवल एंजाइमों के लिए पर्याप्त हार्मोन प्रदान करता है, बल्कि मस्तिष्क को संकेत भी भेजता है. इसलिए प्रति भोजन का समय 20 मिनट होना चाहिए.
डॉ. अग्रवाल ने आगे कहा, ‘स्वाद कलिकाएं केवल जीभ के सिरे और किनारे पर होती हैं. यदि आप भोजन को निगल लेते हैं, तो मस्तिष्क को संकेत नहीं मिलेंगे. छोटे टुकड़ों को खाने और उन्हें ठीक से चबाने से भी स्वाद कलिकाओं के माध्यम से संकेत मिलते हैं. पेट की परिपूर्णता या फुलनेस का आकार तय करता है कि कोई कितना खा सकता है. मस्तिष्क को संकेत तभी मिलता है जब पेट 100 प्रतिशत भरा हो. इसलिए, आपको पेट भरने की बजाय उसके आकार को भरना चाहिए. इसके अलावा, अगर आप कम खाते हैं तो समय के साथ पेट का आकार सिकुड़ जाएगा’.
(एजेंसी से इनपुट)
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