मूर्ख दिवस (April Fools’ Day) यानी एक अप्रैल (1 April) से कुछ समय पहले ही लोग सोचने लगते हैं कि इस बार क्‍या किया जाए. कैसे अपने दोस्‍तों, करीबियों के साथ मस्‍ती की जाए, उन्‍हें परेशान किया जाए.

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हो भी क्‍यों ना, 1 अप्रैल को पूरी दुनिया में मूर्ख दिवस के रूप में जो मनाया जाता है. पर क्‍या आप जानते हैं कि इसे मनाने की शुरुआत कबसे हुई?

मूर्ख दिवस की शुरुआत
कहा जाता है कि सबसे पहला अप्रैल फूल साल 1381 में बनाया गया था. तब इंग्लैंड के राजा रिचर्ड द्वितीय और बोहेमिया की रानी एनी ने अपनी सगाई की घोषणा 32 मार्च 1381 के दिन करने की घोषणा की थी. वहां के लोगों ने इस बात को बिना सोचे-समझे गंभीरता से लिया और इंतजार करने लगे. जब सभी ने अपने घर जाने के बाद बात पर गौर किया तब उन्हें पता चला की उन्हें इस तरह से एक अप्रैल के दिन मूर्ख बनाया गया था.

ये कहानी है मशहूर
– 1 अप्रैल 1698 को कई लोगों को “शेर की धुलाई देखने” के लिए धोखे से टावर ऑफ लंदन में ले जाया गया.

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– लेखक कैंटरबरी टेल्स (1392) ने अपनी एक कहानी ‘नन की प्रीस्ट की कहानी’ में 30 मार्च और 2 दिन लिखा, जो प्रिंटिंग में गलती के चलते 32 मार्च हो गई, जो असल में 1 अप्रैल का दिन था. इस कहानी में एक घमंडी मुर्गे को एक चालक लोमड़ी ने बेवकूफ बनाया था. इस गलती के बाद कहा जाने लगा कि लोमड़ी ने 1 अप्रैल को मुर्गे को बेवकूफ बनाया.

– अंग्रेजी साहित्य के महान लेखक ज्योफ्री चौसर का ‘कैंटरबरी टेल्स (1392)’ ऐसा पहला ग्रंथ है जहां 1 अप्रैल और बेवकूफी के बीच संबंध जिक्र किया गया था.

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