न्यूयार्क: एक्टिविटी ट्रैकर्स, स्मार्टफोन और स्मार्टवाचेज जैसे डिवाइसों में उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के इस्तेमाल से लोगों के स्वास्थ्य डेटा की निजता को खतरा उत्पन्न हो गया है. एक भारतीय मूल के शोधार्थी की अगुवाई में किए गए अध्ययन से यह जानकारी मिली है, जिसमें बताया गया कि वर्तमान कानून और नियमन लोगों के गोपनीय स्वास्थ्य जानकारी को सुरक्षित रखने में सक्षम नहीं है.

Tips: सर्दियों में गुड़ खाने से बढ़ता है खून, होते हैं ये 7 बेमिसाल फायदे…

यूनिवर्सिटी ऑफ केलिफरेनिया- बर्कले के इंजीनियर अनिल अश्विनी की अगुवाई में किए गए इस शोध के निष्कर्षो से पता चलता है कि एआई के प्रयोग से यह संभव है कि किसी व्यक्ति के दैनिक पैटर्न के आंकड़ों से उस व्यक्ति की पहचान कर ली जाए, जो एक्टिविटी ट्रैकर्स, स्मार्टवाचेज और स्मार्टफोन्स से एकत्र किए जाते हैं और इन आंकड़ों को जनसांख्किीय डेटा के साथ मिलान किया जा सकता है. अश्विनी ने कहा कि शोध के नतीजे एक गंभीर समस्या की तरफ ध्यान दिलाते हैं. अगर आप सारे आंकड़ों को अलग-अलग रखें तो भी कोई बड़ी आसानी से इनका मिलान कर सभी जानकारियां जुटा सकता है.

Tips: योग करने से तेजी से सामान्य हो सकता है शुरुआती स्तर का हाई ब्‍लड प्रेशर

डिवाइस से उत्पन्न आंकड़ों का संभावित दुरुपयोग होने की आशंका
उन्होंने कहा कि सैद्धांतिक रूप से आप अपने स्मार्टफोन पर फेसबुक एप द्वारा डेटा इकट्ठा करने की कल्पना कर सकते हैं, उसके बाद वह हेल्थ केयर का डेटा किसी अन्य कंपनी से खरीदकर दोनों का मिलान कर सकती है. उन्होंने आगे कहा कि अब उनके पास स्वास्थ्य देखभाल डेटा होगा और किस व्यक्यि का यह डेटा है, इसकी जानकारी होगी. अब या तो वे इसके आधार पर विज्ञापन बेचना शुरू करेंगे या फिर इस डेटा को किसी तीसरे को बेच देंगे. अश्विनी के मुताबिक, समस्या इन डिवाइसों में नहीं है. बल्कि इस डिवाइस से उत्पन्न आंकड़ों का संभावित दुरुपयोग और खुले बाजार में बेचने से है. इसे रोकने के लिए डेटा सुरक्षा को लेकर कड़े कानून और नियमन लागू करने होंगे.

लाइफस्टाइल की और खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.