कश्मीर में ईद-उल-जुहा के चलते रविवार को मवेशी बाजार खरीदारों की भीड़ से पटा पड़ा है. बुधवार को ईद-उल-जुहा के मद्देनजर इस बाजार में लोगों का तांता लगा है. इस दिन दुनियाभर के मुसलमानों द्वारा बकरे की कुर्बानी देने की परंपरा है, जिसे बकरीद भी कहा जाता है. घाटी के सभी कस्बों में मवेशी दुकानों पर भीड़ है लेकिन श्रीनगर का ईदगाह का मैदान सबसे बड़ा मवेशी बाजार है.Also Read - बॉलीवुड एक्‍ट्रेस नोरा फतेही को लग्जरी कार गिफ्ट में दी थी, ठगी के आरोपी सुकेश चंद्रशेखर का दावा

कुर्बानी के लिए जिन जानवरों का इस्तेमाल किया जाता है उनमें भेड़, बकरे शामिल हैं और कहीं-कहीं पर ऊंटों की कुर्बानी भी दी जाती है. राज्य सरकार ने इन कुर्बानी वाले जानवरों के लिए कीमत तय की है लेकिन इस पर लोग अधिक गौर नहीं करते. एक तंदरुस्त भेड़ की कीमत 5,000 से लेकर 12,000 रुपये के बीच हो सकती है. Also Read - T20 World Cup 2021: पहले लीग मैच में ऑस्ट्रेलिया को जीत दिलाकर खुश हैं मार्कस स्टोइनिस

कुर्बानी के जानवरों के अलावा कश्मीरियों में बेकरी के उत्पाद भी खासे लोकप्रिय हैं. ईद के त्योहार पर परिवार के लिए बेकरी के सामान खरीदना घाटी में एक रिवाज बन गया है. श्रीनगर में प्रसिद्ध बेकरी ईद पर लाखों रुपये के केक, पेस्ट्री और बिस्किट बेचती हैं. Also Read - राष्ट्रपति एर्दोआन ने अमेरिका, फ्रांस समेत 10 देशों के राजदूतों को निकाला, जानिए क्या है तुर्की के खुन्नस की वजह?

ईद पर अन्य जरूरी चीजों में नए कपड़े और पटाखे शामिल हैं. ईद-उल-फितर के विपरीत ईद-उल-जुहा पर कसाई की दुकानों पर लोग काफी कम नजर आते हैं क्योंकि ईद-उल-जुहा पर पड़ोसी, रिश्तेदार और दोस्त घर-घर जाकर कुर्बानी का गोश्त बांटते हैं.

कई बार देखा गया है कि खास किस्म के बकरों की कीमत लाखों रुपए तक पहुंच जाती है लेकिन कई लोग फिर भी उसे बड़े चाव से खरीदते हैं औक कुर्बानी देते हैं. ऐसी मान्यता है कि कुर्बानी के गोश्त को बांटने से सवाब मिलता है. इसके अलावा इस दिन कई प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ भी उठाते हैं.