नई दिल्ली: बौद्ध धर्म का जन्म भारत में ही हुआ था. बुद्ध का जन्म लुंबिनी में 563 ईसा पूर्व इक्ष्वाकु वंशीय क्षत्रिय शाक्य कुल के राजा शुद्धोधन के घर में हुआ था. भगवान बुद्ध को नारायण का अवतार माना जाता है, इसलिए बौद्ध धर्म के साथ-साथ हिन्दू धर्म में भी भगवान बुद्ध का महत्व माना गया है. देश में बुद्ध के लिए कई मंदिर और मोनेस्ट्री बनाए गए, इनमें से कुछ को ध्वस्त भी कर दिया गया. लेकिन अब भी देश में कई मशहूर बौद्ध मंदिर, स्तूप और मोनेस्ट्री मौजूद हैं, जो आज तीर्थ स्थल हैं. इस साल बुद्ध पूर्णिमा 30 अप्रैल 2018 को है. इस मौके पर आप भी जानिये बुद्ध के उन मशहूर मंदिरों के बारे में. Also Read - कठिन वक्त में मुश्किलों का सामना कर रहे लोगों के साथ खड़ा है भारतः पीएम मोदी

1. महाबोधी
Mahabodhi-Temple Also Read - Buddha Purnima 2020: बुद्ध पूर्णिमा समारोह में आज पीएम मोदी होंगे शामिल, कोरोना वॉरियर्स को करेंगे संबोधित

यहां बुद्ध ने ‘बोध’ प्राप्त किया था. भारत के बिहार में स्थित गया स्टेशन से यह स्थान 7 मील दूर है. Also Read - Buddha Purnima 2020 Quotes: बुद्ध पूर्णिमा पर भगवान बुद्ध की ये प्रेरणादायी बातें बदल देंगी जिंदगी के प्रति नजरिया

2. तवांग मोनेस्ट्री
Tawang-Monastery

यह अरुणाचल प्रदेश में स्थित है. दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोनेस्ट्री है. यह तवांग नदी के किनारे बना है. यहां कम से 300 मॉन्क रहते हैं.

3. थिकसे मोनेस्ट्री
Thikse-Monastery

यह लेह से 18 किलोमीटर दूर बना है. इंडस नदी की पहाड़ियों पर. इसे साल 1430 में बनाया गया था. यह लद्दाख का सबसे बड़ा बौद्ध मोनेस्ट्री है. इस एक मोनेस्ट्री में 10 मंदिर बने हुए हैं.

4. नामग्याल मोनेस्ट्री
Namgyal-Monastery

यह हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में है. यहां 200 मॉन्क रहते हैं. दलाई लामा भी यहीं रहते हैं. धर्मशाला में यह आकर्षण का केंद्र है.

5. घुम मोनेस्ट्री
Ghum-Monastery

पश्चिम बंगाल के दार्जलिंग से 8 किलोमीटर दूरी पर है यह. यह 15 फूट लंबी बुद्ध की मूर्ति है.

6. माइंडरोलिंग मोनेस्ट्री
Mindrolling-Monastery

उत्तराखंड के देहरादून जिले में स्थित इस मोनेस्ट्री बहुत महत्व है और लोग दूर-दूर से इसके दर्शन के लिए आते हैं. यहां बुद्ध की 107 फीट लंबी मूर्ति है.

7. महापरिनिर्वाण मंदिर
Mahaparinirvana-Temple

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में महापरिनिर्वाण मंदिर में बनी बुद्ध की मूर्ति यहां आकर्षण का केंद्र है.ऐसी मान्यता है कि इस मूर्ति को 5वें दशक में बनाया गया था, जिसकी खोज साल 1876 में हुई.