नई दिल्ली: बुद्ध पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध का धरती पर जन्म हुआ था. वैदिक ग्रंथों के अनुसार भगवान बुद्ध नारायण के अवतार हैं, उन्होंने 2500 साल पहले धरती पर लोगों को अहिंसा और दया का ज्ञान दिया. हिन्दू धर्म के अनुयायियों के साथ ही बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों के लिए भी बुद्ध पूर्णिमा बेहद महत्व रखता है. बुद्ध पूर्णिमा को वैशाख पूर्णिमा भी कहते हैं. क्योंकि यह वैशाख महीने की पूर्णमासी को आता है. इस साल बुद्ध पूर्णिमा 30 अप्रैल 2018 को मनाया जाएगा. हिन्दू इसे कर्म जयंती के नाम से भी मनाते हैं.Also Read - कठिन वक्त में मुश्किलों का सामना कर रहे लोगों के साथ खड़ा है भारतः पीएम मोदी

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बुद्ध पूर्णिमा को भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में मनाया जाता है. इस दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था, इसलिए लोग कई कार्यक्रमों का भी आयोजन करते हैं. लोग देश और दुनिया के कई बौद्ध धार्मिक स्थलों पर घूमने जाते हैं और भगवान बुद्ध का दर्शन करते हैं. Also Read - Buddha Purnima 2020 Quotes: बुद्ध पूर्णिमा पर भगवान बुद्ध की ये प्रेरणादायी बातें बदल देंगी जिंदगी के प्रति नजरिया

इस दिन भगवान बुद्ध के भक्त फूल चढ़ाते हैं, अगरबत्ती और मोमबत्तियां जलाते हैं तथा भगवान बुद्ध के पैर छूकर शांति के लिए प्रार्थना करते हैं. इस दिन वह मेडिटेशन करते हैं और मंत्रों का उच्चारण करते हैं. कुछ लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं और भगवान बुद्ध को फल व मिठाई चढ़ाते हैं. कुछ लोग इस दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा भी करते हैं. दुनियाभर से बौद्ध धर्म के अनुयायी बोधगया आते हैं और प्रार्थना करते हैं.

शुभ मुहूर्त

पूर्णिमा तिथि कब होगी शुरू: 29 अप्रैल 2018 को सुबह 06:37 AM से शुरू
तिथि कब होगी समाप्त: 30 अप्रैल 2018 को सुबह 06:27 AM पर.

हिन्दू धर्म में कोई भी त्योहार उदया तिथि में मनाई जाती है, इसलिए बुद्ध पूर्णिमा भी 30 अप्रैल 2018 को मनाई जाएगी.

पूजन विधि

इस दिन बौद्ध धर्म के अनुयायियों के घरों में दीप जलाए जाते हैं और घर को फूलों से सजाया जाता है. हिन्दू धर्म में जैसे दिवाली का महत्व है, बौद्ध में बुद्ध पूर्णिमा का उतना ही महत्व है. इस दिन लोग बौद्ध धर्म ग्रंथों का भी पाठ करते हैं. मंदिरों और घरों में अगरबत्ती जलाई जाती है.

मूर्ति पर फल-फूल चढ़ाए जाते हैं और दीपक जलाकर पूजा की जाती है. इस दिन बोधिवृक्ष की पूजा की जाती है. उसकी शाखाओं पर हार व रंगीन पताका लगाई जाती है.

बोधिवृक्ष के जड़ों में बुद्ध पूर्णिमा के दिन दूध व सुगंधित पानी डाला जाता है. ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में शांति और सुख बना रहता है. वृक्ष के पास दीप भी जलाया जाता है. गरीबों को भोजन कराएं और पक्षियों को दाना खिलाएं. इस दिन मांस-मदिरा का सेवन नहीं किया जाता.