नई दिल्‍ली: चैत्र नवरात्र‍ि से नववर्ष के पंचांग की गणना शुरू होती है. साल में तीन बार लोग नवरात्र‍ि मनाते हैं. पहली चैत्र नवरात्र‍ि मनाई जाती है, दूसरी शारदीय नवरात्रि और इसके अलावा लोग गुप्‍त नवरात्र‍ि भी मनाते हैं. इन तीनों नवरात्र‍ि में लोग मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा करते हैं. यह चैत्र शुक्‍ल पक्ष की वासंतिक नवरात्र‍ि है. Also Read - Chaitra Navratri 2020 8th Day: चैत्र नवरात्रि की अष्टमी आज, लॉकडाउन में ऐसे करें कन्या पूजन, शुभ मुहूर्त

कब शुरू होगी नवरात्र‍ि
इस बार नवरात्र‍ि 18 मार्च से शुरू हो रही है, जो कि 25 मार्च तक चलेगी. इस दौरान मां के नौ स्‍वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है और भक्‍त नौ दिनों तक व्रत रखते हैं. Also Read - Chaitra Navratri 2020 Durga Ashtami: दुर्गा अष्टमी पर ऐसे करें मां महागौरी का पूजन, देवी का मंत्र, व्रत कथा

कलश स्थापना का मुहूर्त
हर साल मां दुर्गा की पूजा के लिए कलश स्‍थापना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही की जाती है. इस बार प्रतिपदा शाम 06.32 तक रहेगी. ऐसे में आप शाम 06.32 तक कलश स्‍थापना कर सकते हैं. पंडित विनोद मिश्र के अनुसार वैसे तो कलश स्‍थापना के लिए शाम 06.32 बजे तक हर समय शुभ है लेकिन इसमें भी अगर आप सुबह 09.00 से 10.30 तक कलश स्‍थापना कर लेते हैं तो और भी अच्‍छा होगा. क्‍योंकि यह चैत्र शुक्‍ल प्रतिपदा का सबसे शुभ समय होगा. Also Read - Chaitra Navratri 2020 7th day: चैत्र नवरात्रि की सप्तमी आज, मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा, जानें मंत्र, पूजन व‍िध‍ि

कलश की स्थापना विधि
नवरात्र‍ि के नौ दिनों में साफ-सफाई का खास ख्‍याल रखा जाता है. अगर आप कलश स्‍थापना करना चाहते हैं तो पहले उस स्‍थान को अच्‍छी तरह साफ कर लें. ध्‍यान रहे कि वहां गलती से भी कोई जूठा सामान ना हो. अगर आप मिट्टी पर पूजन कर रहे हैं तो पहले उस स्‍थान को लीप लें. फिर वहां एक लकड़ी का पटरा रखकर उस पर नया लाल कपड़ा बिछा लें. इसके साथ एक मिट्टी के बर्तन में जौ बो दें. इसी बर्तन पर जल से भरा हुआ कलश रखें.

ध्‍यान रहे कि कलश का मुख खुला ना छोड़ें. उसे ढक्‍कन से ढक दें. कलश पर रखा ढक्कन खाली ना छोड़ें, उसमें चावल भर दें और उसके बीचों-बीच एक नारियल रखें. इतना करने के बाद दीप जलाएं और कलश का पूजन करें. आप सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का कलश स्‍थापित कर सकते हैं.