नई दिल्ली: नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है. मां ब्रह्मचारिणी को भगवती भी कहते हैं. ऐसी मान्यता है कि मां ब्रह्चारिणी ने भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए एक हजार साल तक तपस्या की थी. इनकी अराधना करने वाले भक्तों में एकाग्र रहने की क्षमता बहुत ज्यादा होती है. वह जीवन में कभी भटकते नहीं. Also Read - #Navratri 2018 9th Day: नवमी को इस विधि से करें मां सिद्धिदात्री की पूजा, पढ़ें मंत्र, आरती और महत्व

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ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली. देवी का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है. मां के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में यह कमण्डल धारण किए हैं. Also Read - Navratri Navmi 2018: कन्या पूजन के बाद क्यों किया जाता है 'चंडी होमम हवन', शुभ मुहूर्त, विधि और मंत्र- जानिये

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

या देवी सर्वभूतेषु मां बह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

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सुबह स्नान कर सूर्य को जल चढ़ाएं और तुलसी व भगवान शालिग्राम को भी जल चढ़ाएं. जिस जगह मां दुर्गा की स्थापना की है वहां बैठकर मां ब्रह्मचारिणी को नमन करें और मां के मंत्र का जाप करें. इसके बाद मां ब्रह्मचारिणी कथा का पाठ करें. इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है.

मां ब्रह्मचारिणी कथा

मां ब्रह्मचारिणी का जन्म हिमालय के घर हुआ था. भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए मां ब्रह्मचारिणी हे घोर तपस्या की थी. इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी यानी कि ब्रह्मचारिणी नाम से जाना गया. ऐसी मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी ने अपनी तपस्या के दौरान अन्न ग्रहण नहीं किया था. उन्होंने सैकड़ों वर्षों तक सिर्फ फल और फूल खाकर ही अपना निर्वाह किया.

इस दौरान मां ब्रह्मचारिणी खुले आकाश के नीचे रहीं. उन्होंने बारिश और धूप का कष्ट सहा और वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं. इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए. कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं. पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया.

हजारों वर्षों तक तप करने के कारण मां ब्रह्मचारिणी का शरीर क्षीण हो गया. ब्रह्माण्ड के सभी देवी देवता मां ब्रह्मचारिणी की तपस्या से हतप्रभ हुए और कहा कि – हे देवी आत तक किसी ने ऐसी कठोर तपस्या नहीं की. यह आप से ही संभव थी. आपकी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे. अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ. जल्द ही आपके पिता आपको लेने आ रहे हैं. मां की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए. मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्व सिद्धि प्राप्त होती है.