नई दिल्‍ली: शुक्रवार रात को सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण लगने जा रहा है. सूतक चल रहा है. शुक्रवार देर रात ग्रहण को देखा जा सकेगा. भारत में ग्रहण को लेकर कई तरह की मान्‍यताएं प्रचलित हैं.

ऐसी भी खबरें आ रही हैं कि कुछ राशियों पर इसका अच्‍छा असर होगा तो कुछ पर बुरा. अगर आपकी राशि पर इसका बुरा असर होने वाला है तो घबराने की जरूरत नही है. इसका हल मिल गया है. बस एक मंत्र का जाप करने से आपको सभी रुकावटों से राहत मिल सकती है.

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ज्‍योतिषियों की मानें तो ग्रहण के बुरे प्रभावों से बचने के लिए पूजा-पाठ में इस्तेमाल किए जाने वाले मंत्रों का उच्चारण करना अच्छा रहता है. ग्रहण काल में गायत्री मंत्र का जाप करते रहने से प्रत्येक राशि के सभी दोषों का निवारण हो जाता है.

इस दौरान हनुमान चालीसा और हनुमान जी के मंत्रोच्चारण का भी विशेष महत्व है. ज्योतिषयों का कहना है कि चंद्र ग्रहण के दौरान जाप अवश्‍य करें. गायत्री मंत्र: ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्.

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बड़े लोग महामृत्‍युंजय मंत्र: ॐ त्रयंबकं यजामहे, सुगन्धि पुष्टिवर्द्धनं, उर्वारुक्मिाव, बंधनात्, मृत्‍योंर्मुचीय मामृतात् का जप भी कर सकते हैं.

क्‍या ना करें गृहणियां
ग्रहण के दौरान शारीरिक और मानसिक श्रम से बचने की सलाह दी जाती है. चूंकि ग्रहण के कारण प्रकृत्ति पर काफी असर होता है इसलिए ऐसा कहा जाता है. ज्‍योतिष में सलाह दी जाती  है कि ग्रहण के दौरान सहज रहने का प्रयास करें. ध्‍यान रखें इस दौरान कलह ना हो. घरेलू कार्य भी ना करें. हो सके तो भगवान का ध्‍यान करें. चंद्रमा के मंत्रों का जाप करें.

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अशुद्ध हो जाता है भोजन
जग्‍गी वासुदेव की इशा फाउंडेशन की वेबसाइट पर बताया गया है कि जो चीज चंद्रमा के एक पूर्ण चक्र के दौरान 28 दिनों में होती है, वह चंद्रग्रहण के दौरान ग्रहण के दो से तीन घंटे के भीतर सूक्ष्म रूप में घटित होती है. ऊर्जा के अर्थों में पृथ्वी की ऊर्जा गलती से इस ग्रहण को चंद्रमा का एक पूर्ण चक्र समझ लेती है. पृथ्वी ग्रह में कुछ ऐसी चीजें घटित होती हैं, जिससे अपनी प्राकृतिक स्थिति से हटने वाली कोई भी चीज तेजी से खराब होने लगती है. इसलिए पका हुआ भोजन किसी सामान्य दिन के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से एक सूक्ष्म रूप में सड़न के चरणों से गुजरता है. अगर आपके शरीर में भोजन मौजूद है, तो दो घंटे के समय में आपकी ऊर्जा लगभग अट्ठाइस दिन बाद की अवस्था में पहुंच जाएगी.

यही वजह है कि कच्चे फलों और सब्जियों में कोई बदलाव नहीं होता, जबकि पका हुआ भोजन ग्रहण से पहले जैसा होता है, उसमें एक स्पष्ट बदलाव आता है. जो पहले पौष्टिक भोजन होता है, वह जहर में बदल जाता है. जहर एक ऐसी चीज है जो आपकी जागरूकता को नष्ट कर देता है.

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अगर वह आपकी जागरूकता को छोटे स्तर पर नष्ट करता है, तो आप सुस्त हो जाते हैं. अगर वह एक खास गहराई तक आपकी जागरूकता नष्ट कर देता है, तो आप नींद में चले जाते हैं. अगर कोई चीज आपकी जागरूकता को पूरी तरह नष्ट कर देता है, तो आपकी मृत्यु हो जाती है. सुस्ती, नींद, मृत्यु – यह बस क्रमिक बढ़ोत्तरी है. इसलिए पका हुआ भोजन किसी सामान्य दिन के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से एक सूक्ष्म रूप में सड़न के चरणों से गुजरता है.

मंदिरों को रखें ढककर
आपको पता ही होगा कि ग्रहण के दौरान मंदिरों के पट बंद रखे जाते हैं. अगर आपके भी घर में मंदिर स्‍थापित है तो इस दौरान मंदिर के पट बंद कर दीजिए. या उन्‍हें ढक दीजिए. देव प्रतिमाओं को भी ढंककर रखना चाहिए. उनके पूजन या स्पर्श से बचें. ग्रहण के दौरान केवल मंत्र जाप का विधान है.

क्‍या करें ग्रहण में
ग्रहण से पहले या बाद में ही खाना खाएं. देव मूर्ति को स्पर्श ना करें. केवल जप कर सकते हैं. यज्ञ कर्म सहित सभी तरह के अग्निकर्म करने की मनाही होती है. ऐसा माना जाता है कि इससे अग्निदेव रुष्ट हो जाते हैं.

बता दें कि शुक्रवार देर रात चंद्र ग्रहण लगेगा. इसी दिन गुरु पूर्णिमा भी है. इससे पहले सूतक 9 घंटे पूर्व दोपहर 2:54 बजे से शुरू हो जाएगा. ग्रहण रात 11:54 से शुरू होकर रात 3:49 बजे समाप्त होगा.

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