नई दिल्‍ली: शुक्रवार रात को सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण लगने जा रहा है. शुक्रवार देर रात इसे देखा जा सकेगा. ग्रहण को लेकर कई तरह की मान्‍यताएं भी हैं. इन्‍हीं में से एक मान्‍यता है ग्रहण के दौरान भोजन ना करने की.

क्‍या कहते हैं जग्‍गी वासुदेव
इशा फाउंडेशन की ओर से बताया गया है कि जो चीज चंद्रमा के एक पूर्ण चक्र के दौरान 28 दिनों में होती है, वह चंद्रग्रहण के दौरान ग्रहण के दो से तीन घंटे के भीतर सूक्ष्म रूप में घटित होती है. ऊर्जा के अर्थों में पृथ्वी की ऊर्जा गलती से इस ग्रहण को चंद्रमा का एक पूर्ण चक्र समझ लेती है. पृथ्वी ग्रह में कुछ ऐसी चीजें घटित होती हैं, जिससे अपनी प्राकृतिक स्थिति से हटने वाली कोई भी चीज तेजी से खराब होने लगती है. इसलिए पका हुआ भोजन किसी सामान्य दिन के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से एक सूक्ष्म रूप में सड़न के चरणों से गुजरता है. अगर आपके शरीर में भोजन मौजूद है, तो दो घंटे के समय में आपकी ऊर्जा लगभग अट्ठाइस दिन बाद की अवस्था में पहुंच जाएगी.

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यही वजह है कि कच्चे फलों और सब्जियों में कोई बदलाव नहीं होता, जबकि पका हुआ भोजन ग्रहण से पहले जैसा होता है, उसमें एक स्पष्ट बदलाव आता है. जो पहले पौष्टिक भोजन होता है, वह जहर में बदल जाता है. जहर एक ऐसी चीज है जो आपकी जागरूकता को नष्ट कर देता है.

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अगर वह आपकी जागरूकता को छोटे स्तर पर नष्ट करता है, तो आप सुस्त हो जाते हैं. अगर वह एक खास गहराई तक आपकी जागरूकता नष्ट कर देता है, तो आप नींद में चले जाते हैं. अगर कोई चीज आपकी जागरूकता को पूरी तरह नष्ट कर देता है, तो आपकी मृत्यु हो जाती है. सुस्ती, नींद, मृत्यु – यह बस क्रमिक बढ़ोत्तरी है. इसलिए पका हुआ भोजन किसी सामान्य दिन के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से एक सूक्ष्म रूप में सड़न के चरणों से गुजरता है.

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मंदिरों को रखें ढककर
आपको पता ही होगा कि ग्रहण के दौरान मंदिरों के पट बंद रखे जाते हैं. अगर आपके भी घर में मंदिर स्‍थापित है तो इस दौरान मंदिर के पट बंद कर दीजिए. या उन्‍हें ढक दीजिए. देव प्रतिमाओं को भी ढंककर रखना चाहिए. उनके पूजन या स्पर्श से बचें. ग्रहण के दौरान केवल मंत्र जाप का विधान है.

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क्‍या करें ग्रहण में
ग्रहण से पहले या बाद में ही खाना खाएं. देव मूर्ति को स्पर्श ना करें. केवल जप कर सकते हैं. यज्ञ कर्म सहित सभी तरह के अग्निकर्म करने की मनाही होती है. ऐसा माना जाता है कि इससे अग्निदेव रुष्ट हो जाते हैं.

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क्‍या ना करें गर्भवती महिलाएं
ग्रहण काल और उससे पहले सूतक के दौरान गर्भवती स्‍त्रियों को कई तरह के काम नहीं करने चाहिए. जैसे इस समय में कुछ चाकू से काटना नहीं चाहिए. इसके अलावा सिलाई, बुनाई का काम नहीं करना चाहिए. ऐसा कहा जाता है कि ग्रहण का असर हर राशि पर पड़ता है. पर गर्भवती स्त्री और बच्चे के लिए चंद्र ग्रहण का प्रभाव 108 दिनों तक रहता है. गर्भवती महिला को ग्रहण काल में बिना देव मूर्ति स्पर्श किए जप करना चाहिए. ये भी बताया गया है कि गर्भवती स्त्री को ग्रहण के समय अपनी सुरक्षा करनी चाहिए. घर की दहलीज पार नहीं करनी चाहिए.

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सूतक का समय
चंद्र ग्रहण 3 घंटे 55 मिनट का है. ग्रहण का सूतक काल शुक्रवार दिन में 2:54 पर लग जाएगा. इसके बाद शुभ कार्य करने की मनाही होती है. चूंकि शुक्रवार को ही गुरु पूर्णिमा भी है, इसलिए पंडितों ने सलाह दी है कि जो भी शुभ काम करने हो सूतक से पहले कर लें.

क्‍या करें सूतक से पहले
पंडित कहते हैं कि सूतक लगने से पहले घर में पूरे दिन की भोजन सामग्री तैयार कर लें. फिर सभी में तुलसी पत्‍ता डाल दें. दूध-दही में भी तुलसी पत्‍ता डालना चाहिए. सूतक के दौरान भगवान के मंत्रों का जाप करें.

बता दें कि शुक्रवार देर रात चंद्र ग्रहण लगेगा. इसी दिन गुरु पूर्णिमा भी है. इससे पहले सूतक 9 घंटे पूर्व दोपहर 2:54 बजे से शुरू हो जाएगा. ग्रहण रात 11:54 से शुरू होकर रात 3:49 बजे समाप्त होगा.

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