मां के दूध के जरिये मिल रहा बच्‍चे को वैक्‍सीनेशन का लाभ, स्‍टडी में सामने आई ये बात

नवजात श‍िशु को दूध पिलाने वाली मांओं को वैक्‍सीनेशन लगवाना चाहिए या नहीं इस पर लोगों में मतभेद है. इसी बीच एक शोध की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि श‍िशु को दूध पिलाने वाली जिन मांओं ने कोविड-19 वैक्‍सीन लगवाई है, उनके बच्‍चों में भी कोरोना से लडने वाली प्रतिरोधक क्षमता का विकास हुआ है.

Updated: January 10, 2022 2:37 PM IST

By India.com Hindi News Desk

Maharashtra woman murders children for crying.
Maharashtra woman murders children for crying. (Representational Image)

नई दिल्‍ली: युनिवर्स‍िटी ऑफ मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट की एक स्टडी में पाया गया है कि मां के दूध के जरिये नवजात शिशु को भी कोविड-19 वैक्‍सीन का लाभ मिल सकता है. स्‍टडी की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि कोविड-19 वैक्‍स‍ीनेशन कराने के बाद जिन मांओं ने अपने नवजात श‍िशु को दूध पिलाया है, ऐसे बच्‍चों के शरीर में SARS-CoV-2 एंटीबॉडी पाया गया. स्‍टडी करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि मां के वैक्‍सीनेश‍न का लाभ उनके बच्‍चों को भी मिल रहा है. ऐसे शिशुओं में कोरोना से लडने की क्षमता बढी है. ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी जर्नल में पब्लिश की गई इस र‍िपोर्ट में दावा किया गया है कि नई-नई मां बनने वाली मांओं और उनके शिशु को वैक्‍सीनेशन से कोई खतरा नहीं है, बल्‍क‍ि इससे दोनों को लाभ मिल रहा है.

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जानें क्या कहते हैं रिसर्च के प्रमुख लेखक
शोध करने के लिये वैज्ञानिकों ने शिशुओं के मल के नमूनों का इस्‍तेमाल किया. शोध के लेखक विग्‍नेश नारायणस्वामी ने कहा कि शिशुओं के मल के नमूनों में SARS-CoV-2 एंटीबॉडी पाए गए हैं. बता दें कि विग्‍नेश नारायणस्वामी वरिष्ठ लेखक कैथलीन अर्कारो के स्तन दूध अनुसंधान प्रयोगशाला (Breast Milk Research Lab) में पीएचडी उम्मीदवार हैं और पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विभाग (Department of Veterinary and Animal Sciences) में पर्यावरण विज्ञान के प्रोफेसर हैं.

विग्‍नेश नारायणस्वामी ने एक जरूरी बात यह भी कही है कि उन सभी शिशुओं में एंटीबॉडी पाई गई हैं जिनकी मां ने वैक्सीन लवाई थी, फिर चाहे वे 1.5 महीने का शिशु हो या 23 महीने का.

ऐसे शुरु की गई थी रिसर्स
इस रिसर्च में अमेरिका से 30 स्तनपान कराने वाली महिलाएं थीं, उनमें से ज्यादातर स्वास्थ्य कार्यकर्ता को नामांकित किया गया था. उन महिलाओं को जनवरी और अप्रैल 2021 के बीच कोविड-19 एमआरएनए वैक्सीन लगाई गई थी. इन महिलाओं ने वैक्सीनेशन से पहले, अपनी पहली डोज के दो से तीन सप्ताह बाद और दूसरी डोज के तीन सप्ताह बाद तक स्तन के दूध के सैंपल दिए थे.

उन्होंने पहली खुराक के 19 दिन बाद और दूसरी खुराक के 21 दिन बाद, ब्लड सैंपल भी दिए. महिलाओं की दूसरी डोज के 21 दिन बाद उनके शिशु के मल के नमूने लिए गए. इन रिसर्च में इन सभी सैंपल का पूरा इस्तेमाल किया गया था. सैपल का टेस्ट रिसेप्टर-बाइंडिंग डोमेन (आरबीडी)-विशिष्ट इम्युनोग्लोबुलिन (आईजी) ए और आईजीजी एंटीबॉडी के लिए किया गया था. स्तन के दूध के सैंपल में, SARS-CoV-2 और साथ ही चार तरह के प्रोटीन स्पाइक को बेअसर करने के लिए एंटी-आरबीडी आईजीजी एंटीबॉडी पाई गई थी.

अर्कारो ने कहा कि जिन महिलाओं ने वैक्सीन के बाद बीमार महसूस किया था, उन्होंने शिशुओं को ज्यादा एंटीबॉडी प्रदान की है. आर्कारो ने कहा कि इस रिसर्च को कोई खास फंडिंग नहीं दी गई थी, इसमें भाग लेने वाले लोगों ने ही इसे चलाया था.

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Published Date: January 10, 2022 2:36 PM IST

Updated Date: January 10, 2022 2:37 PM IST