ज्‍यादातर लोग इस बात से परेशान रहते हैं कि उनके बच्‍चे घंटो फोन से चिपके रहते हैं. इससे उनकी सेहत पर ऐसे असर होते हैं जिनका आप अंदाजा तक नहीं लगा सकते.
कुछ समय पहले हुए एक शोध में भी ऐसे ही परिणाम सामने आए थे. ये शोध किया था ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने.Also Read - Free Fire Redeem Codes 11 November 2021: आज मिल रहे हैं कई शानदार रिवॉर्ड्स, जानें डिटेल

ब्रिटेन के चिकित्सकों ने कहा था कि फोन और टैबलेट के बेतहाशा इस्तेमाल से बच्चों की अंगुलियों की मांसपेशियां सही ढंग से विकसित नहीं हो पाती हैं, जिससे उन्हें पेंसिल या पेन पकड़ने में मुश्किल आ सकती है. Also Read - Garena Free Fire Redeem Codes 10 November 2021: गेम जीतने के लिए फ्री में पाएं आइटम्स, जानें कैसे

ब्रिटेन के हॉर्ट ऑफ इंग्लैंड फाउंडेशन एनएचएस ट्रस्ट की प्रधान पीडियाट्रिक थेरेपिस्ट सैली पायने ने कहा, उतने मजबूत एवं निपुण हाथों वाले बच्चे स्कूल में नहीं आ रहे हैं जो 10 साल पहले देखने को मिलती थी. Also Read - Garena Free Fire Redeem Codes 9 November 2021: आज मिलेंगे कई मजेदार रिवॉर्ड्स और चुटकियों में जीताएंगे आपको गेम

उन्होंने कहा, पेंसिल पकड़ने और चलाने के लिए आपकी अंगुलियों की बारीक मांसपेशियों पर आपका मजबूत नियंत्रण होना चाहिए. इन कौशलों को विकसित करने के लिए बच्चों को बहुत मौकों की जरूरत पड़ती है. समाचार-पत्र गार्डियन ने पायन के हवाले से कहा है, बच्चों को ब्लॉक बनाने, खिलौने या रस्सियां खींचने जैसे मांसपेशियां बनाने वाले खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करने की बजाए उन्हें आईपैड पकड़ा देना ज्यादा आसान होता है.

लंदन की ब्रूनेल यूनिवर्सिटी में एक रिसर्च क्लिनिक चलाने वाली मेलिसा प्रूंटी ने कहा कि तकनीक के अत्याधिक इस्तेमाल के चलते कई बच्चों में लिखने का हुनर देर से विकसित हो सकता है. यह क्लिनिक लिखावट समेत बचपन में सीखे जाने वाले अन्य कौशल की जांच करता है.

फोन पर बच्चे
जब बच्चे बहुत छोटे होते हैं तभी से इस समस्या की शुरुआत हो जाती है लेकिन पैरंट्स इस आने वाले खतरे को समझ नहीं पाते. 10 साल या उसके आसपास के बच्चे ही नहीं बल्कि इन दिनों तो बहुत छोटे यानी 3-4 साल के बच्चे भी मोबाइल और टैबलेट स्क्रीन से इतने ज्यादा चिपके रहते हैं जितना पहले कभी नहीं थे. एक स्टडी के नतीजे बताते हैं कि दुनियाभर में 8 से 12 साल के बीच के बच्चे हर दिन करीब 4 घंटा 36 मिनट का वक्त स्क्रीन मीडिया के सामने बिताते हैं.

साइकॉलजिस्ट डॉ शीमा हफीज कहती हैं, मनोरंजन के मकसद से तो शायद भारत के बच्चे भी इतना ही वक्त मोबाइल और टीवी के सामने बिताते होंगे लेकिन अगर स्कूल में होने वाली कम्प्यूटर साइंस की क्लास और एक्सपोजर के दूसरे माध्यमों को भी जोड़ दिया जाए तो भारतीय बच्चों के लिए यह समय और ज्यादा हो जाता है.
(एजेंसी से इनपुट)