शादीशुदा कपल्‍स हमेशा ऐसे ऑप्‍शंस की तलाश में रहते हैं जिससे अनचाहे गर्भ से बचा जा सके. ऐसे में सही तरह के गर्भनिरोधक का चुनाव बेहद अहम होता है. Also Read - Contraceptives For Females: अनचाहा गर्भ रोकने के बेहद आसान तरीके, लाइफ हो जाएगी स्ट्रेस फ्री

इनका चुनाव करने से पहले आपको इस समय बाजार में उपलब्‍ध ऐसे गर्भनिरोधकों के बारे में जानना चाहिए, जिसका इस्‍तेमाल ज्‍यादातर शादीशुदा जोड़े कर रहे हैं. यानी ये हिट हैं. Also Read - प्राकृतिक गर्भनिरोधक भी हो सकता है नीम! जानें कैसे करें इस्‍तेमाल....

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– गर्भनिरोधक दवाओं का सेवन महिलाएं लंबे समय से करती आ रही हैं. ये हार्मोनल गर्भ निरोधक दवाएं होती हैं. गोलियां गर्भावस्था को रोकने के लिए हार्मोन का उपयोग करती हैं. एक शोध में पता चला था कि इन दवाओं का प्रयोग सबसे ज्‍यादा किया जाता है. पिल्‍स एग्‍स के निर्माण को रोकती है. इन्‍हें कंबाइंड ओरल गर्भनिरोधक गोलियां कहा जाता है. कंबाइंड गर्भनिरोधक गोलियों में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टिन हार्मोन होते हैं. ऐसी पिल्‍स फर्टिलाइजेशन को रोक सकती हैं लेकिन ये एचआईवी या एसटीडी से सुरक्षा प्रदान नहीं करतीं.

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– डेपो प्रोवेरा इंजेक्शन आजकल काफी पसंद किया जा रहा है. ये इंजेक्शन हार्मोनल गर्भ निरोधक है. इन्हें हर तीन महीने में एक बार लिया जा सकता है. डेपो प्रोवेरा इंजेक्शन अनचाहे गर्भ से 99 फीसदी सफलता प्रदान करते हैं.

– उपलब्‍ध गर्भनिरोधक विकल्‍पों में कंडोम सबसे सस्ते, आसानी से उपलब्ध गर्भनिरोधक हैं. कंडोम का प्रयोग पुरुष करते हैं, जिससे शुक्राणु महिला की योनि में प्रवेश नहीं कर पाते. ये यौन संक्रमित बीमारियों से भी रक्षा करते हैं.

– डायाफ्राम शुक्राणु को योनि में प्रवेश करने से रोककर गर्भावस्था को रोकता है. डायाफ्राम को महिला की योनि में लेटेक्स डिस्क की तरह रखा जाता है. हर बार जब डायाफ्राम का उपयोग किया जाता है, इसे शुक्राणुनाशक माना जाना चाहिए, जो शुक्राणु को मारता है और वीर्य को गर्भाशय में प्रवेश करने से रोकता है. इस गर्भनिरोधक को संभोग से 6 घंटे पहले योनि में रखा जाता है और सेक्‍स के 24 घंटे के अंदर निकाल लिया जाता है.

– असुरक्षित यौन क्रिया के बाद इमरजेंसी गर्भ निरोधकों को दो से तीन दिनों तक लिया जा सकता है. ये दवाओं के रूप में बाजार में उपलब्‍ध हैं. इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्‍टीव पिल्स (ईसीपी). ईसीपी की एक खुराक उन महिलाओं के लिए पर्याप्त है, जिनका वजन 70 किलो से कम है. वहीं जिन महिलाओं का वजन 70 किलो से अधिक है उन्‍हें इसके डोज से पहले डॉक्‍टर से सम्‍पर्क करना चाहिए.

– इंट्रा यूटेराइन डिवाइस. ये कई तरह के आकार में आती है. इंग्लिश के T के आकार वाली डिवाइस, यानी कॉपर-टी. ये प्लास्टिक की होती है और इसमें धागा निकला रहता है. इसे महिला की कोख में फिट किया जाता है.

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