Diabities जितनी तेजी से युवाओं को हो रही है उतनी ही तेजी से अब बच्‍चे भी इस बीमारी की गिरफ्त में आ रहे हैं. जी हां, बच्‍चों में डायबिटीज होने के मामले बढ़ रहे हैं. और डॉक्‍टर्स इस पर कई बार चिंता भी जता चुके हैं. Also Read - Alert: Diabetes है तो सिर्फ मीठा ही नहीं ये चीजें भी जहर हैं आपके लिए!

Diabities यानी मधुमेह 0-14 वर्ष के बच्चों को हो रहा है. जब उनका शरीर किसी भी कारण से आवश्यकतानुसार इन्सुलिन नहीं बना पाता, जो शक्कर उनके शरीर को ऊर्जा प्रदान करने का काम करती है, वही शक्कर उनके रक्त में जाकर एक भयंकर बीमारी का रूप ले लेती है. Also Read - Non Veg जैसा टेस्‍ट पर फायदों में उससे कहीं ज्‍यादा बेहतर, खाएं कटहल...

न्यूट्री एक्टीवीनिया की संस्थापक अवनी कौल कहती हैं, ‘ ये बीमारी बच्चों में क्यों होती है इसका कारण अभी पता नहीं चला है, हालांकि बीमारी से लड़ने की क्षमता जब कम हो जाती है को कई बीमारियां हमला करती हैं. ऐसे ही शरीर में मधुमेह जैसी बीमारियों का वास होता है. यदि परिवार के बड़े लोग मधुमेह से ग्रसित होते हैं, तब भी बच्चों को यह बीमारी हो सकती है क्योकि यह वंशानुगत भी होती है’. Also Read - भारत में ये बीमारी पश्चिमी देशों से भी ज्‍यादा फैल रही, ऐसे करें बचाव...

Diabetes type 1

क्‍या हैं लक्षण
जब बच्चों को जरूरत से ज्यादा भूख अथवा प्यास लगे, धुंधला दिखने लगे, वजन बिना कारण कम होने लगे अथवा थकान अधिक लगने लगे, उस समय सर्तक हो जाना चाहिए. उनकी तुरन्त जांच करवानी चाहिए ताकि अगर वे मधुमेह से ग्रसित हों तो जल्दी ही उनका इलाज शुरू किया जा सके.

कैसे बचें
अवनी ने कहा कि बीमार व्यक्ति चाहे बच्चा हो अथवा बड़ा, उसके लिए रक्त में शक्कर की मात्रा पर नियंत्रण रखना अनिवार्य है. इसे वो पौष्टिक आहार खाकर या नियमित रूप से व्यायाम करके नियन्त्रित कर सकता है. कभी-कभी इन्सुलिन की आवश्यकता भी पड़ सकती है. रक्त में शक्कर की मात्रा पर नजर रखनी चाहिए ताकि उसमें उतार-चढ़ाव की जानकारी तुरन्त मिल सके.

इन्सुलिन की कमी से सांस तेज चलने लगती है, त्वचा एवं मुंह सूखने लगता है, सांस से बदबू आने लगती है, उल्टी आने का अंदेशा रहता है एवं पेट में दर्द हो सकता है. यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है.
(एजेंसी से इनपुट)