लाइफस्‍टाइल से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है जिससे भारत में लोग सबसे ज्‍यादा प्रभावित हो रहे हैं. ये बीमारी पश्चिम देशों से ज्‍यादा भारतीयों को है. Also Read - यूरोप के कई देशों में कोरोना वायरस की दूसरी लहर, स्‍पेन की मैड्रिड सिटी में इमरजेंसी लागू

इसका नाम जानकर आपको शायद हैरत हो. पर ये सच है कि डायबिटीज अब भारत में बेहद कॉमन हो चुकी बीमारी है. Also Read - Coronavirus: अधीर रंजन चौधरी ने की केंद्र सरकार की तारीफ, हिंदुस्‍तान ग्‍लोबल लीडर बनेगा

ब्रिटेन के विद्वानों द्वारा कराये गये एक अध्ययन में ये बात सामने आई है. अध्‍ययन के अनुसार पश्चिमी देशों की तुलना में मधुमेह से मृत्यु दर, भारत में तीन गुना अधिक है. Also Read - Coronavirus: दुनिया में मृतकों का आंकड़ा 1,70,000 के पार, करीब 25 लाख लोग संक्रमित

इसमें ये भी पता चला कि मस्तिष्काघात से मौत के मामले पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में ये आंकड़ा चार गुना अधिक है. दिल से जुड़ी बीमारियों से लोगों के मरने की दर करीब तीन गुना ज्यादा है. यह भी पता चला कि भारतीयों में गर्भाशय कैंसर से मौत के मामले पश्चिमी देशों के लोगों की तुलना में छह गुना अधिक है.

नेचर पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार कैंसर, हृदयरोग और मस्तिष्काघात जैसी बीमारियां विकसित देशों की तुलना में विकासशील देशों में अधिक घातक हैं.

इंपीरियल कॉलेज लंदन में स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रमुख अध्ययनकर्ता प्रोफेसर माजिद एजाती ने कहा, भारत में कैंसर, हृदय और गुर्दा रोगों तथा मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों की जल्द रोकथाम, जल्द निदान और इलाज की दिशा में स्वास्थ्य सेवा योजनाएं बुनियादी तौर पर बदली जानी चाहिए. ये रोग भारत में रोगियों की संख्या, मौत के मामलों और आर्थिक नुकसान की सबसे बड़ी वजह हैं.

प्रोफेसर एजाती के साथ डॉ जेम्स बेनेट ने भी इस अध्ययन में भाग लिया. इसमें यह बात भी सामने आई कि कम और मध्यम आय वाले ऊष्णकटिबंधीय देशों में गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) से मौत के मामले पश्चिमी देशों के मुकाबले ज्यादा हैं.

(एजेंसी से इनपुट)