दिवाली के त्योहार पर पटाखे जलाने संबंधी जितनी भी बहस हों, पर कई लोगों की सोच अब भी यही है कि बिन पटाखे दिवाली अधूरी है. तर्क-वितर्क से दूर लोग अपने बच्चों के लिए जरूर कहीं से पटाखे ले आते हैं. Also Read - डियर जिंदगी : दीपावली की तीन कहानियां और बच्‍चे…

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इस बार आप भी करेंगे. पर इससे पहले एक बार ये जानना बेहद जरूरी है कि इन पटाखों से प्रदूषण कितना होता है. Also Read - देश भर में परंपरा और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई दिवाली, रौशनी से जगमग हुई शाम

अब आप सोच रहे होंगे कि सांप गोली या ऐसे ही अन्य पटाखे, जो ज्यादा आवाज तक नहीं करते, भला वे क्या हवा में प्रदूषण फैलाएंगे. द हेल्थ साइट की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पटाखा आवाज नहीं करता, इसलिए पेरेंट्स बेझिझक बच्‍चों को यह दिलवा देते हैं. जबकि यह सबसे ज्यादा मात्रा में पीएम 2.5 छोड़ता है.

ये खबर चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन (सीआरएफ) और पुणे यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट के अनुसार लिखी गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सांप पटाखे (स्नेक टैबलेट) को जलाने से सबसे अधिक मात्रा में हानिकारक तत्व निकलता है.

firecrackers

खतरे की बात ये है कि सांप पटाखे के धुएं में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 माइक्रांस व्यास से भी छोटे होते हैं. इसलिए ये फेफड़े के काफी अंदरूनी हिस्से में पहुंच जाते हैं, जो बच्चों की सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं. बारूद के इस्तेमाल से बने हर तरह के पटाखों से सेहत को नुकसान पहुंचता है, लेकिन सांप पटाखा सबसे ज्यादा नुकसानदायक है.

सीआरएफ के निदेशक और अध्ययन के प्रमुख डॉ संदीप साल्वी ने कहा है कि हम सभी बच्चों को सांप पटाखा, फुलझड़ी, चकरी और अनार जलाने से नहीं रोकते क्योंकि ये तेज आवाज नहीं करते. बच्चे इनके अधिक पास रहने की वजह से बड़ी मात्रा में प्रदूषण ग्रहण करते हैं.

रिपोर्ट में बताया गया है कि सांप गोली केवल 12 सेकंड में जल जाती है. इतनी देर में यह पीएम 2.5 के 64,500 एमसीजी/एम3 पैदा करती है. जबकि पीएम 2.5 की स्वीकार्य सीमा सिर्फ 50 एमसीजी/एम3 है.

एक हजार पटाखों वाली लड़ी केवल 48 सेकेंड में 38,540 एमसीजी/एम3 पैदा करती है. इसका असर 12 मिनट तक रहता है.

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